अरावली का अस्तित्व बचाने को सुप्रीम कोर्ट सख्त: “अवैध खनन भ्रष्टाचार की देन, इसे हर हाल में रोकें,” CJI की राजस्थान सरकार को चेतावनी – NewsKranti

अरावली का अस्तित्व बचाने को सुप्रीम कोर्ट सख्त: “अवैध खनन भ्रष्टाचार की देन, इसे हर हाल में रोकें,” CJI की राजस्थान सरकार को चेतावनी

अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन को "गंभीर अपराध" करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण को होने वाला नुकसान भविष्य की पीढ़ियों के लिए भयानक होगा। राजस्थान में पेड़ों की कटाई और नए खनन पट्टों पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • अवैध खनन को सुप्रीम कोर्ट ने 'गंभीर अपराध' और 'भ्रष्टाचार' का नतीजा बताया।
  • अरावली संरक्षण के लिए हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनाने का निर्णय।
  • राजस्थान सरकार को नए खनन पट्टे और पेड़ों की कटाई तुरंत रोकने के निर्देश।
  • कोर्ट ने कहा- अरावली का नुकसान भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों पर हमला है।
  • 'वन' और 'अरावली' की परिभाषाओं पर दोबारा होगा कानूनी मंथन।

नई दिल्ली:

देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला अरावली को अवैध खनन के चंगुल से छुड़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अवैध खनन को एक गंभीर पर्यावरणीय अपराध बताया और स्पष्ट किया कि इसके प्रभाव “भयानक और अपूरणीय” हो सकते हैं।

भ्रष्टाचार और अवैध खनन पर प्रहार

सुनवाई के दौरान जब यह बात सामने आई कि साल 2024 के अदालती आदेशों के बावजूद राजस्थान में पेड़ों की कटाई जारी है और नए खनन पट्टे दिए जा रहे हैं, तो CJI ने तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “हमारे आदेश बिल्कुल स्पष्ट हैं। दुर्भाग्य से अवैध खनन और भ्रष्टाचार एक साथ मौजूद हैं। राज्य सरकार को अपनी पूरी मशीनरी हरकत में लानी होगी। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”

स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का होगा गठन

कोर्ट ने संकेत दिया कि वह अरावली के संरक्षण के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष विशेषज्ञ समिति बनाने जा रहा है। यह समिति सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम करेगी और इसमें वन, खनन और पर्यावरण क्षेत्रों के दिग्गज शामिल होंगे। कोर्ट का मानना है कि अब इस मामले में केवल सरकारी रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञों की समग्र दृष्टि की आवश्यकता है।

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100 मीटर नियम और परिभाषा पर मंथन

सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर लगी रोक बरकरार रखी है जिसमें 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली मानने की बात कही गई थी। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की दलीलों पर गौर करते हुए कोर्ट ने माना कि ‘अरावली’ और ‘वन’ की परिभाषाओं को अलग-अलग रखकर देखने की जरूरत है। मामले की अगली सुनवाई अब चार सप्ताह बाद होगी, तब तक सभी पक्षों को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

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