शेयर बाजार में हाहाकार: एक हफ्ते में 2.5% टूटा निफ्टी, FIIs ने निकाले ₹36,500 करोड़ – NewsKranti

शेयर बाजार में हाहाकार: एक हफ्ते में 2.5% टूटा निफ्टी, FIIs ने निकाले ₹36,500 करोड़

2026 की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए भारी रही है। इस सप्ताह सेंसेक्स 81,537 और निफ्टी 25,048 के स्तर पर बंद हुए। रियल्टी और स्मालकैप शेयरों में सबसे ज्यादा मार पड़ी है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • निफ्टी इस सप्ताह 2.51% गिरकर 25,048 पर बंद।
  • सेंसेक्स 2.43% फिसलकर 81,537 के स्तर पर आया।
  • रियल्टी सेक्टर में 11.33% की सबसे बड़ी गिरावट।
  • विदेशी निवेशकों (FII) ने ₹36,500 करोड़ की बिकवाली की।
  • डॉलर के मुकाबले रुपया ₹92 के करीब पहुंचा।

1 जनवरी से अब तक बाजार में 4% की गिरावट, रुपया ₹92 के पार

मुंबई, 24 जनवरी:

भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह जबरदस्त बिकवाली का दौर देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिका की नई टैरिफ नीति की आशंका और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार जारी मुनाफावसूली ने बाजार की कमर तोड़ दी है। इस हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांकों में 2.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

रियल्टी सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट

बाजार के हर सेक्टर में बिकवाली का दबाव दिखा। सबसे ज्यादा असर रियल्टी सेक्टर पर पड़ा, जो 11.33% तक टूट गया। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, टेलीकॉम और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 5% से अधिक की गिरावट देखी गई। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 769 अंक गिरकर 81,537 पर और निफ्टी 25,048 के स्तर पर बंद हुआ।

FIIs की भारी बिकवाली और रुपया कमजोर

आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से लगभग 36,500 करोड़ रुपए निकाल लिए हैं। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी ऐतिहासिक गिरावट के साथ 92 रुपए के करीब पहुंच गया है, जिससे आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।

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गिरावट के मुख्य कारण:

  1. वैश्विक तनाव: अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड और टैरिफ नीति को लेकर दिए गए बयानों से निवेशक सहमे हुए हैं।
  2. तिमाही नतीजे: कई बड़ी कंपनियों के वित्तीय नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।
  3. बॉन्ड यील्ड: वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने जोखिम भरे निवेश (शेयर बाजार) से निवेशकों का ध्यान हटाया।
  4. बजट की प्रतीक्षा: निवेशक अब आगामी केंद्रीय बजट 2026 और फेडरल रिजर्व के फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बजट से पहले बाजार में कुछ समय के लिए ‘शॉर्ट कवरिंग’ की वजह से उछाल आ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में स्थिरता तभी आएगी जब वैश्विक भू-राजनीतिक हालात सुधरेंगे।

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