भारत-EU के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: 18 साल का इंतजार खत्म, मर्सिडीज-BMW से लेकर विदेशी शराब तक होगी सस्ती; देखें पूरी लिस्ट – NewsKranti

भारत-EU के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: 18 साल का इंतजार खत्म, मर्सिडीज-BMW से लेकर विदेशी शराब तक होगी सस्ती; देखें पूरी लिस्ट

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते से लग्जरी कारों, वाइन और मेडिकल उपकरणों के दाम घटेंगे, जबकि भारतीय आईटी और सर्विस सेक्टर के लिए यूरोप के दरवाजे खुलेंगे।

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ख़बर एक नज़र में :
  • भारत और EU के बीच 18 साल बाद व्यापार समझौता संभव।
  • लग्जरी कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटकर 40% तक आएगी।
  • यूरोपीय देशों में भारतीय आईटी और सर्विस सेक्टर का विस्तार होगा।
  • 2031 तक द्विपक्षीय व्यापार 51 अरब डॉलर पार करने का अनुमान।
  • मेडिकल उपकरण और मशीनरी सस्ते होने से भारतीय उद्योगों को लाभ।

नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के आर्थिक रिश्तों में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। करीब 18 वर्षों की लंबी जद्दोजहद और दर्जनों दौर की वार्ताओं के बाद, दोनों पक्ष ऐतिहासिक ‘मुक्त व्यापार समझौते’ (FTA) पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं। वाणिज्य गलियारों में इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह न केवल दो बड़े बाजारों को जोड़ेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार की दिशा भी बदल देगा।

18 साल की तपस्या का फल: 2007 से चल रही थी बातचीत

भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस समझौते की नींव साल 2007 में रखी गई थी। हालांकि, टैरिफ, डेटा सुरक्षा और लेबर स्टैंडर्ड जैसे मुद्दों पर असहमति के कारण यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। मोदी सरकार के पिछले कुछ वर्षों के कूटनीतिक प्रयासों और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में हुई हालिया वार्ताओं ने इसे अंतिम मुकाम तक पहुँचाया है।

आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर? (क्या सस्ता होगा)

इस समझौते के लागू होते ही विदेशी सामानों पर लगने वाली भारी-भरकम इंपोर्ट ड्यूटी (सीमा शुल्क) में बड़ी कटौती होगी।

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  1. लग्जरी कारें: मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू (BMW), ऑडी और पॉर्श जैसी गाड़ियां अब आपकी पहुंच में होंगी। 15,000 यूरो (करीब 16.3 लाख रुपये) से अधिक मूल्य की कारों पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 40% तक लाया जा सकता है।
  2. विदेशी शराब: यूरोपीय वाइन और स्पिरिट्स के शौकीनों के लिए खुशखबरी है। स्कॉच और वाइन की कीमतों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है।
  3. इलेक्ट्रॉनिक और मशीनरी: उन्नत चिकित्सा उपकरण (Medical Devices), विमान के पुर्जे, हाई-टेक केमिकल्स और मेटल स्क्रैप सस्ते होंगे। इससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी।
  4. डेयरी और चॉकलेट: यूरोप से आने वाली प्रीमियम चॉकलेट और डेयरी प्रोडक्ट्स के दाम भी कम हो सकते हैं।

भारतीय सर्विस सेक्टर के लिए ‘सुनहरा मौका’

सिर्फ सामान ही नहीं, यह डील भारतीय युवाओं के लिए नौकरियों की बौछार लेकर आएगी। समझौते के तहत भारत के सर्विस सेक्टर को यूरोप के 27 देशों में आसान पहुंच मिलेगी।

  • IT और इंजीनियर्स: भारतीय सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स और इंजीनियर्स के लिए वीजा नियमों में ढील मिल सकती है।
  • बिजनेस सेवाएं: टेलीकॉम, कंसल्टेंसी और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों का दबदबा बढ़ेगा।

आंकड़ों में समझें: भारत बनाम यूरोपीय संघ

पैरामीटरयूरोपीय संघ (EU)भारत
जीडीपी (GDP)20 ट्रिलियन डॉलर4.18 ट्रिलियन डॉलर
आबादी45 करोड़140 करोड़
निर्यात (Exports)2.9 ट्रिलियन डॉलर824.5 अरब डॉलर
आयात (Imports)2.6 ट्रिलियन डॉलर915 अरब डॉलर

अर्थव्यवस्था को मिलेगा 50 अरब डॉलर का बूस्टर

एमके ग्लोबल की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, इस FTA के चलते साल 2031 तक दोनों पक्षों के बीच व्यापार 51 अरब डॉलर (लगभग 4.67 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने की संभावना है। इससे भारत के कपड़ा, हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों के लिए यूरोप एक बड़ा बाजार बनकर उभरेगा।

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