अयोध्या/देहरादून:
उत्तराखंड की देवभूमि में स्थित विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम की पवित्रता और मर्यादा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) द्वारा मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने के लिए लाए जा रहे प्रस्ताव ने देशभर के धार्मिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस प्रस्ताव का रामनगरी अयोध्या के प्रमुख संतों और महामंडलेश्वरों ने पुरजोर स्वागत किया है। संतों का तर्क है कि जिस तरह अन्य धर्मों के सर्वोच्च स्थलों पर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है, उसी तरह सनातन धर्म के इन पवित्र शक्ति केंद्रों की शुचिता भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
मक्का-मदीना का हवाला और संतों की हुंकार
अयोध्या के प्रमुख संत महामंडलेश्वर विष्णु दास ने इस निर्णय पर खुशी जाहिर करते हुए तीखे सवाल पूछे हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “जब हिंदू मक्का और मदीना नहीं जा सकते, जब हिंदुओं को मस्जिदों के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं है, तो फिर हमारे परम पवित्र तीर्थ स्थलों पर गैर-हिंदुओं का क्या काम? उत्तराखंड देवभूमि है, यहाँ ऋषियों ने हजारों वर्षों तक तपस्या की है। यहाँ की ऊर्जा और आस्था का केंद्र केवल सनातनी हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग देश में रहकर ‘वंदे मातरम’ कहने से हिचकिचाते हैं, उन्हें इन पवित्र स्थानों पर जाने की अनुमति क्यों मिलनी चाहिए? महामंडलेश्वर ने स्पष्ट किया कि यदि कोई गैर-हिंदू इन धामों के दर्शन करना चाहता है, तो उसे पहले हिंदू धर्म अपनाना होगा और राम नाम का जाप करना होगा।
सनातन धर्म के खिलाफ साजिश रोकने का आह्वान
साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दासी ने भी इस प्रस्ताव को ‘सराहनीय’ बताया है। उन्होंने अपील की है कि न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे भारत के सभी प्रमुख तीर्थों और धार्मिक नगरों में कट्टरपंथियों और चरमपंथियों की गतिविधियों को रोकने के लिए गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए। उनका मानना है कि सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं, जिन्हें रोकने के लिए ऐसे कड़े नियमों की तत्काल आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का रुख
इस पूरे मामले पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संतुलित लेकिन कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि देवभूमि के धार्मिक और पौराणिक स्थलों के संचालन के संबंध में सरकार धार्मिक संगठनों और संतों की राय के अनुरूप ही कार्य करेगी। सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार वर्तमान कानूनों का अध्ययन कर रही है और पौराणिक महत्व को ध्यान में रखते हुए ही आगे कदम उठाएगी।
क्यों उठ रही है यह मांग?
बीते कुछ समय से देवभूमि के तीर्थ क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों और ‘लैंड जिहाद’ जैसे आरोपों के चलते स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों में भारी आक्रोश है। BKTC का यह प्रस्ताव तीर्थों की मर्यादा को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। संतों का कहना है कि यह केवल पर्यटन स्थल नहीं हैं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था के स्तंभ हैं।
