नई दिल्ली |
देश के आर्थिक भविष्य का खाका खींचने वाला ‘बजट सत्र 2026’ दस्तक देने को तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि इस साल का आर्थिक सर्वेक्षण 29 जनवरी को पेश किया जाएगा, जबकि वित्त मंत्री 1 फरवरी को देश का आम बजट पेश करेंगी। हालांकि, सत्र शुरू होने से पहले ही सियासत गरमा गई है, जिसे देखते हुए रिजिजू ने विपक्ष से सकारात्मक चर्चा और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की है।
विपक्ष से अपील: “हंगामा नहीं, चर्चा करें”
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बजट सत्र देश के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। उन्होंने विपक्ष के नेताओं से हाथ जोड़कर अपील की कि वे सदन की कार्यवाही में बाधा न डालें। रिजिजू ने कहा, “सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। हम चाहते हैं कि विपक्ष रचनात्मक सुझाव दे, ताकि बजट को जनहित में और बेहतर बनाया जा सके। सदन शोर-शराबे के लिए नहीं, बल्कि देश की समस्याओं के समाधान के लिए है।”
29 जनवरी को खुलेगा अर्थव्यवस्था का लेखा-जोखा
बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ होगी। इसके ठीक बाद 29 जनवरी को सरकार आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेगी। यह दस्तावेज पिछले एक साल में देश की आर्थिक सेहत का रिपोर्ट कार्ड होता है। इसमें जीडीपी ग्रोथ रेट, महंगाई के आंकड़े और राजकोषीय घाटे जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। जानकारों का मानना है कि इस बार का सर्वे विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदमों को दिखाएगा।
1 फरवरी: मिडिल क्लास और किसानों की नजरें
पूरी दुनिया और खासकर भारत के मध्यम वर्ग की नजरें 1 फरवरी पर टिकी हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस दिन अपना लगातार अगला बजट पेश कर इतिहास रचेंगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बड़े ऐलान हो सकते हैं। किरेन रिजिजू ने संकेत दिया है कि यह बजट ‘समावेशी विकास’ पर केंद्रित होगा।
सत्र के हंगामेदार रहने के आसार
भले ही सरकार सहयोग की अपील कर रही हो, लेकिन विपक्ष ने अभी से ही घेराबंदी शुरू कर दी है। बेरोजगारी, किसानों की एमएसपी (MSP) की मांग और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। रिजिजू की अपील को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है ताकि पिछले सत्रों की तरह यह सत्र हंगामे की भेंट न चढ़ जाए।
