UGC के फरमान पर प्रियंका चतुर्वेदी का बड़ा हमला: "छात्रों के बीच नफरत फैला रही सरकार, तुरंत वापस लें नियम", शिक्षा नीति पर छिड़ा घमासान - NewsKranti

UGC के फरमान पर प्रियंका चतुर्वेदी का बड़ा हमला: “छात्रों के बीच नफरत फैला रही सरकार, तुरंत वापस लें नियम”, शिक्षा नीति पर छिड़ा घमासान

प्रियंका चतुर्वेदी ने यूजीसी के हालिया फैसलों को 'विभाजनकारी' बताते हुए सरकार से इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने शिक्षा के भगवाकरण और छात्रों के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता जताई।

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ख़बर एक नज़र में :
  • प्रियंका चतुर्वेदी ने यूजीसी के नए दिशानिर्देशों को 'विभाजनकारी' करार दिया।
  • सरकार पर शिक्षा के माध्यम से छात्रों में नफरत फैलाने का लगाया गंभीर आरोप।
  • यूजीसी के विवादित नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की।
  • शिक्षा के 'राजनीतिकरण' और 'भगवाकरण' पर जताई कड़ी आपत्ति।
  • युवाओं के भविष्य और रोजगार को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल।

नई दिल्ली |

देश की शिक्षा व्यवस्था और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हालिया दिशा-निर्देशों को लेकर राजनीतिक गलियारों में उबाल आ गया है। शिवसेना (UBT) की फायरब्रांड सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने यूजीसी की नई नीतियों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ऐसे नियम थोप रही है जिससे विद्यार्थियों के बीच ‘नफरत’ और ‘विभाजन’ की भावना पैदा हो रही है। चतुर्वेदी ने सरकार से इन विवादित नियमों को बिना किसी देरी के वापस लेने की पुरजोर मांग की है।

“शिक्षा का राजनीतिकरण बर्दाश्त नहीं”

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि शिक्षण संस्थान ज्ञान के मंदिर होते हैं, न कि राजनीतिक विचारधारा थोपने के केंद्र। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी के माध्यम से सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों में एक खास किस्म का एजेंडा लागू करना चाहती है। उन्होंने कहा, “जिस तरह के नियम लाए जा रहे हैं, वे छात्रों की एकजुटता को तोड़ रहे हैं और उनके मन में एक-दूसरे के प्रति वैमनस्य पैदा कर रहे हैं। यह देश के भविष्य के लिए घातक है।”

यूजीसी के किन नियमों पर है विवाद?

हालांकि यूजीसी ने हाल के दिनों में कई बदलाव किए हैं, लेकिन विपक्षी दलों का मुख्य विरोध पाठ्यक्रम में बदलाव, इतिहास के पुनर्लेखन के प्रयासों और परिसरों में वैचारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले निर्देशों पर है। प्रियंका चतुर्वेदी का तर्क है कि ये कदम छात्रों को शोध और नवाचार (Innovation) की ओर ले जाने के बजाय उन्हें वैचारिक लड़ाइयों में उलझा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना चाहती है या उन्हें राजनीतिक मोहरा बनाना चाहती है?

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विपक्ष ने एकजुट होकर सरकार को घेरा

प्रियंका चतुर्वेदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरा विपक्ष शिक्षा के निजीकरण और तथाकथित ‘भगवाकरण’ के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन ‘जनविरोधी’ और ‘छात्र विरोधी’ फैसलों को वापस नहीं लिया, तो छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी युवाओं से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की है।

छात्रों के भविष्य पर मंडराता खतरा

चतुर्वेदी ने जोर देकर कहा कि आज के दौर में जब बेरोजगारी चरम पर है, सरकार का ध्यान रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर होना चाहिए। इसके विपरीत, यूजीसी ऐसे नियमों में उलझा हुआ है जिनका सीधा संबंध छात्रों के शैक्षणिक सुधार से कम और विभाजनकारी राजनीति से ज्यादा है। उन्होंने मांग की कि शिक्षाविदों और छात्र संघों के साथ व्यापक चर्चा के बाद ही कोई भी बड़ा फैसला लिया जाना चाहिए।

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