राष्ट्रपति के अभिभाषण पर विपक्ष का हंगामा: किरेन रिजिजू का तीखा प्रहार, बोले– 'जिम्मेदार सांसद नहीं करते ऐसा अमर्यादित व्यवहार' - NewsKranti

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर विपक्ष का हंगामा: किरेन रिजिजू का तीखा प्रहार, बोले– ‘जिम्मेदार सांसद नहीं करते ऐसा अमर्यादित व्यवहार’

संसदीय केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्ष द्वारा किए गए शोर-शराबे और विरोध की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र का अपमान बताया है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • संवैधानिक अपमान: किरेन रिजिजू ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान हंगामे को संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन बताया।
  • संसदीय परंपरा: रिजिजू के अनुसार, राष्ट्रपति का भाषण एक औपचारिक और गौरवशाली अवसर होता है, जिसमें विरोध की कोई जगह नहीं होती।
  • विपक्ष की भूमिका: मंत्री ने विपक्ष को अपनी जिम्मेदारी समझने और सदन की गरिमा बनाए रखने की सलाह दी।
  • जनता का संदेश: रिजिजू ने कहा कि जनता ऐसे आचरण को स्वीकार नहीं करती और इसका जवाब समय आने पर देगी।

नई दिल्ली (ब्यूरो): संसद के बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ हुई, लेकिन इस दौरान विपक्ष द्वारा किए गए विरोध और शोर-शराबे ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के इस व्यवहार पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे ‘अलोकतांत्रिक’ करार दिया है। रिजिजू ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक जिम्मेदार सांसद से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती।

राष्ट्रपति की गरिमा का प्रश्न

संसद भवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, “राष्ट्रपति का पद दलगत राजनीति से ऊपर होता है। जब राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हैं, तो वह पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे समय में विपक्ष द्वारा नारेबाजी करना और विरोध जताना न केवल संसदीय परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि यह देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था का अपमान भी है।”

विपक्ष पर हमलावर हुए रिजिजू

रिजिजू ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को निशाने पर लेते हुए कहा कि विपक्ष हार के सदमे से उबर नहीं पा रहा है और अपनी खीझ सदन की कार्यवाही में बाधा डालकर निकाल रहा है। उन्होंने कहा, “संसद चर्चा और बहस की जगह है, न कि तख्तियां दिखाने और चिल्लाने की। जनता ने सांसदों को उनकी आवाज उठाने के लिए चुना है, लेकिन राष्ट्रपति के सम्मान में खड़े होना भी हर सदस्य का कर्तव्य है।”

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लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी का अभाव

संसदीय कार्य मंत्री ने आगे कहा कि दुनिया भारत के लोकतंत्र को देख रही है। ऐसे में सदन के भीतर सांसदों का ऐसा आचरण एक गलत संदेश भेजता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष के पास मुद्दों पर बात करने के लिए तर्क खत्म हो गए हैं जो वे केवल हंगामे का सहारा ले रहे हैं?

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