कोलकाता |
पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा और अधिकार क्षेत्र को लेकर चल रही लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई में एक नया मोड़ आ गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सीमा सुरक्षा बल को सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवश्यक भूमि सौंपने का महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। इस फैसले के आते ही राजनीति गरमा गई है।
केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा के वरिष्ठ नेता सुकांत मजूमदार ने कोर्ट के इस आदेश का पुरजोर स्वागत किया है। मजूमदार ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार जानबूझकर राष्ट्रीय सुरक्षा के कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रही थी।
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश और विवाद की जड़
काफी समय से बीएसएफ और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच सीमा पर बाड़ लगाने और चौकियों के निर्माण के लिए जमीन के अधिग्रहण को लेकर तनातनी चल रही थी। राज्य सरकार पर आरोप थे कि वह भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में देरी कर रही है। अदालत ने अब स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और बीएसएफ को उसकी जरूरतों के अनुसार जमीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
सुकांत मजूमदार का कड़ा प्रहार: ‘वोट बैंक की राजनीति या देश की सुरक्षा?’
मीडिया से बात करते हुए सुकांत मजूमदार ने कहा, “हम माननीय उच्च न्यायालय के इस फैसले का अभिनंदन करते हैं। ममता बनर्जी की सरकार घुसपैठियों को संरक्षण देने के चक्कर में देश की सीमाओं को असुरक्षित रखना चाहती थी। लंबे समय से बीएसएफ को जमीन देने की फाइलें रुकी हुई थीं, जिससे सीमा पार से होने वाली तस्करी और घुसपैठ को बढ़ावा मिल रहा था।”
उन्होंने आगे कहा कि ममता सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि संघीय ढांचे में राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
