शिलांग/तुरा |
पूर्वोत्तर राज्य मेघालय के शांत गारो हिल्स इलाके में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब स्थानीय निवासियों ने बिजली के खंभों पर आतंकी संगठन ISIS-K (इस्लामिक स्टेट – खुरासान) के नाम से छपे धमकी भरे पोस्टर देखे। इन पोस्टरों में स्थानीय गारो समुदाय के लोगों को साल 2027 तक अपनी पुश्तैनी जमीन खाली करने की चेतावनी दी गई है। इस घटना के बाद से पूरे पश्चिम गारो हिल्स जिले में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
पोस्टर में क्या है? ‘जमीन छोड़ो वरना अंजाम भुगतो’
जानकारी के अनुसार, यह पोस्टर तुरा (Tura) के लॉ कॉलेज के पास एक बिजली के खंभे पर पाया गया। सफेद कागज पर अंग्रेजी में लिखे इस पोस्टर में दावा किया गया है कि इसे ‘ISIS-K की प्लेन बेल्ट एरिया कमेटी’ द्वारा जारी किया गया है। इसमें विशेष रूप से गारो समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि वे फूलबारी, राजबाला, टिकरीकिला और गारोबाधा जैसे इलाकों से अपनी जमीनें खाली कर दें। पोस्टर में धमकी दी गई है कि यदि 2027 तक ऐसा नहीं हुआ, तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
पुलिस की कार्रवाई: जांच में जुटी फोरेंसिक टीम
पश्चिम गारो हिल्स के पुलिस अधीक्षक (SP) अब्राहम संगमा ने बताया कि पुलिस ने पोस्टर को कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस का प्रारंभिक आकलन है कि यह किसी शरारती तत्व या निहित स्वार्थ वाले समूह की ‘सुनियोजित साजिश’ हो सकती है, जिसका मकसद इलाके में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना और लोगों के बीच डर फैलाना है। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या वास्तव में किसी आतंकी संगठन का हाथ है या यह केवल गुमराह करने की कोशिश है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: सीएम और मंत्रियों ने की निंदा
मेघालय के उप-मुख्यमंत्री प्रेस्टन टाइनसोंग और कैबिनेट मंत्री मारकुइज मारक ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। मारकुइज मारक ने कहा, “मेघालय हमेशा से आपसी भाईचारे के लिए जाना जाता है। इस तरह की डराने-धमकाने वाली हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। हमने प्रशासन को दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ने के निर्देश दिए हैं।”
क्षेत्र में बढ़ा तनाव: पहले भी हुई हैं हिंसा की घटनाएं
यह पोस्टर ऐसे समय में मिला है जब हाल ही में राजबाला इलाके में अवैध पत्थर उत्खनन की जांच करने गए एक पर्यावरण कार्यकर्ता दिलसेंग एम. संगमा की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। उस घटना के बाद से ही इलाके में तनावपूर्ण शांति थी। अब इस पोस्टर ने आग में घी डालने का काम किया है। सामाजिक संगठनों ने केंद्र सरकार से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
