भारतीय बैंकों के लिए 'स्वर्ण काल' की शुरुआत, मूडीज ने जताया अटूट भरोसा - NewsKranti

भारतीय बैंकों के लिए ‘स्वर्ण काल’ की शुरुआत, मूडीज ने जताया अटूट भरोसा

मूडीज रेटिंग्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बैंकिंग सिस्टम 2026 में एक ऐतिहासिक शिखर को छूने जा रहा है। मजबूत घरेलू मांग, नीतिगत स्थिरता और 6.4% की अनुमानित जीडीपी वृद्धि के साथ भारतीय बैंक वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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ख़बर एक नज़र में :
  • मजबूत GDP: 6.4% की विकास दर के साथ भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा।
  • कर्ज की मांग: घरेलू मांग और उपभोक्ता खर्च बढ़ने से लोन की मांग 13% तक जाएगी।
  • सुरक्षित बैंकिंग: NPA अब चिंता का विषय नहीं, बैंकों की बैलेंस शीट साफ हुई।
  • RBI की भूमिका: ब्याज दरों में कटौती से बैंकों के मुनाफे में धीरे-धीरे सुधार।
  • ग्लोबल रिस्क: वैश्विक मंदी के बावजूद भारत का बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित।

नई दिल्ली: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स (Moody’s Ratings) ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत का बैंकिंग क्षेत्र साल 2026 में अब तक की अपनी सबसे मजबूत स्थिति में प्रवेश करने जा रहा है। मूडीज ने भारतीय बैंकिंग सिस्टम के लिए अपना आउटलुक ‘स्टेबल’ (स्थिर) बनाए रखा है और अगले 12 से 18 महीनों तक बैंकों के लिए अनुकूल माहौल की भविष्यवाणी की है।

G-20 देशों में सबसे तेज होगी भारत की रफ्तार

मूडीज की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में भारत की वास्तविक जीडीपी (GDP) वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा न केवल उत्साहजनक है, बल्कि जी-20 देशों में सबसे अधिक रहने वाला है। अर्थव्यवस्था की यह रफ्तार बैंकों को अधिक कर्ज देने और अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने में ईंधन का काम करेगी।

NPA का भूत हुआ शांत, क्रेडिट ग्रोथ में उछाल की उम्मीद

बैंकों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात उनके फंसे हुए कर्ज यानी एनपीए (NPA) में भारी कमी है। रिपोर्ट का अनुमान है कि:

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  • NPL अनुपात: बैंकों का खराब कर्ज 2 से 2.5 प्रतिशत के न्यूनतम दायरे में बना रहेगा।
  • कर्ज वृद्धि (Credit Growth): वित्त वर्ष 2027 में कर्ज की मांग 11 से 13 प्रतिशत तक पहुँच सकती है, जो वित्त वर्ष 2026 में 10.6 प्रतिशत रही है।
  • कॉरपोरेट सेक्टर: बड़ी कंपनियों की वित्तीय सेहत सुधरने से कॉरपोरेट लोन की गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार हुआ है।

आम आदमी और बैंकों के मुनाफे पर असर

मूडीज का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 2025 में की गई ब्याज दरों की कटौती का असली लाभ 2026-27 में दिखाई देगा। जमा दरों में गिरावट और कर्ज दरों में स्थिरता से बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सुधार होगा, जिससे बैंकों की लाभप्रदता (Profitability) बढ़ेगी। इसका सीधा मतलब है कि बैंक अधिक सुरक्षित होंगे और आम ग्राहकों को बेहतर सेवाएँ मिलेंगी।

पूंजी का पर्याप्त भंडार और सरकारी कवच

मूडीज ने स्पष्ट किया है कि भारतीय बैंकों के पास वर्तमान में पर्याप्त पूंजी भंडार है। बैंकों को फिलहाल नई पूंजी जुटाने की विशेष आवश्यकता नहीं है। साथ ही, सरकारी बैंकों को केंद्र सरकार का निरंतर समर्थन प्राप्त है, जो वैश्विक वित्तीय संकट की स्थिति में एक मजबूत ढाल का काम करता है। हालांकि, अप्रैल 2027 से लागू होने वाले नए अंतरराष्ट्रीय लेखा मानकों से पूंजी अनुपात पर मामूली असर पड़ सकता है, लेकिन भारतीय बैंक उसे झेलने में सक्षम हैं।

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