साउथ ब्लॉक से विदा हुआ PMO, प्रधानमंत्री बोले- "गुलामी की मानसिकता छोड़, अब सेवा के संकल्प से चलेगा देश" - NewsKranti

साउथ ब्लॉक से विदा हुआ PMO, प्रधानमंत्री बोले- “गुलामी की मानसिकता छोड़, अब सेवा के संकल्प से चलेगा देश”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत निर्मित नए पीएमओ 'सेवा तीर्थ' और 'कर्तव्य भवन' का उद्घाटन किया। ₹1189 करोड़ की लागत से बना यह परिसर पूरी तरह स्वदेशी और अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों से लैस है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • नया पता: प्रधानमंत्री का नया कार्यालय 'सेवा तीर्थ'।
  • ऐतिहासिक तिथि: 13 फरवरी 2026, ठीक 95 साल बाद रायसीना हिल्स का परिदृश्य बदला।
  • बचत: मंत्रालयों के एक जगह आने से रखरखाव और यातायात खर्च में सालाना करोड़ों की बचत।
  • डिजिटल इंडिया: पूरा परिसर 5G कनेक्टिविटी और पेपरलेस ऑफिस के विजन पर तैयार।
  • शपथ: पीएम ने इसे 'लोकतंत्र की नई ऊर्जा' का केंद्र बताया।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश की राजधानी में एक नए युग का सूत्रपात किया। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत नवनिर्मित प्रधानमंत्री कार्यालय, जिसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है, का औपचारिक उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर पीएम मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए औपनिवेशिक विरासत पर कड़ा प्रहार किया।

पीएम ने कहा, “नॉर्थ और साउथ ब्लॉक ब्रिटिश हुकूमत की शक्ति का प्रतीक थे, लेकिन ‘सेवा तीर्थ’ स्वतंत्र भारत की आकांक्षाओं और जन-सेवा के संकल्प का केंद्र है। गुलामी की मानसिकता से निकलना हमारे ‘पंच प्राण’ में से एक है, और आज हम उस दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रहे हैं।”

क्यों खास है ‘सेवा तीर्थ’ परिसर?

दारा शिकोह रोड पर करीब 5.8 एकड़ में फैला यह परिसर तकनीकी और वास्तुकला का बेजोड़ संगम है:

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  • लागत और निर्माण: इसे लगभग ₹1,189 करोड़ की लागत से बनाया गया है। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) को एक ही छत के नीचे लाया गया है।
  • सुरक्षा चक्र: यह इमारत देश की सबसे सुरक्षित इमारतों में से एक है। इसमें अभेद्य साइबर सुरक्षा नेटवर्क, अंडरग्राउंड टनल और बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल जैसे फीचर्स हैं।
  • इको-फ्रेंडली डिजाइन: 4-स्टार GRIHA रेटिंग के साथ यह परिसर सोलर एनर्जी और जीरो-वेस्ट डिस्चार्ज प्रणाली पर आधारित है।

‘कर्तव्य भवन’ से ‘सेवा तीर्थ’ तक का सफर

पीएम ने स्पष्ट किया कि अब शासन ‘सत्ता’ से नहीं बल्कि ‘कर्तव्य’ और ‘सेवा’ से चलेगा। नए परिसर के साथ ‘कर्तव्य भवन-1 और 2’ का भी उद्घाटन हुआ, जहाँ विभिन्न मंत्रालय शिफ्ट होंगे। इससे मंत्रालयों के बीच फाइलों की आवाजाही में लगने वाला समय बचेगा और सरकारी कामकाज की गति में तेजी आएगी।

साउथ ब्लॉक का क्या होगा?

दशकों तक प्रधानमंत्री का कार्यस्थल रहा साउथ ब्लॉक अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा। इसे ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ के हिस्से के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ आने वाली पीढ़ियां भारत की प्रशासनिक यात्रा को देख सकेंगी।

निष्कर्ष: ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ का विजन

यह नया परिसर केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सिद्धांत का जीवंत उदाहरण है। यहाँ से लिए जाने वाले फैसले अब और भी तेज और प्रभावी होंगे, जो ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को गति प्रदान करेंगे।

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