सावधान! कानपुर में सरकारी आवास के नाम पर 'सफेदपोश' ठग सक्रिय, फर्जी मुहर लगाकर गरीबों से डकारे 10 लाख - NewsKranti

सावधान! कानपुर में सरकारी आवास के नाम पर ‘सफेदपोश’ ठग सक्रिय, फर्जी मुहर लगाकर गरीबों से डकारे 10 लाख

रावतपुर थाना क्षेत्र में सरकारी कॉलोनी का झांसा देकर लाखों की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ितों को फर्जी आवंटन पत्र दिए गए थे। पुलिस अब गिरोह की तलाश में है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • मामला: सरकारी आवास दिलाने के नाम पर 10 लाख की ठगी।
  • क्षेत्र: रावतपुर थाना, कानपुर।
  • तरीका: फर्जी अलॉटमेंट लेटर और सरकारी मुहरों का इस्तेमाल।
  • कार्यवाही: 5 लोगों (2 नामजद, 3 अज्ञात) पर FIR दर्ज।
  • अलर्ट: सरकारी योजनाओं के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें।

कानपुर। शहर में सरकारी योजनाओं की आड़ में मासूम और जरूरतमंद लोगों को ठगने वाला एक शातिर गिरोह सक्रिय है। ताजा मामला रावतपुर थाना क्षेत्र का है, जहाँ ‘गरीब आवास योजना’ के तहत पक्का मकान दिलाने का सब्जबाग दिखाकर जालसाजों ने करीब एक दर्जन पीड़ितों से 10 लाख रुपये की मोटी रकम डकार ली। ठगी का खुलासा तब हुआ जब पीड़ितों के हाथ में थमाए गए सरकारी दस्तावेज पूरी तरह फर्जी निकले। पुलिस ने कमिश्नर के निर्देश पर पांच आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

2022 से चल रहा था ठगी का मायाजाल

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा खेल वर्ष 2022-23 के दौरान शुरू हुआ। शातिर ठगों ने रावतपुर इलाके के गरीब तबके के लोगों को निशाना बनाया। उन्हें विश्वास दिलाया गया कि सरकार की नई योजना के तहत उन्हें बेहद कम किश्तों पर सरकारी कॉलोनी आवंटित की जाएगी। खुद को रसूखदार बताने वाले इन ठगों ने पीड़ितों को झांसे में लेने के लिए अलग-अलग किश्तों में पैसा वसूलना शुरू किया। किसी से 50 हजार तो किसी से 1 लाख रुपये तक लिए गए।

फर्जी मुहर और साइन: ऐसे जीता पीड़ितों का भरोसा

जालसाजी की हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने पीड़ितों को बाकायदा ‘आवास आवंटन पत्र’, ‘कूड़ानामा’ और ‘बुलावा पत्र’ जैसे दस्तावेज सौंप दिए। इन कागजों पर सरकारी विभाग की मुहर और बड़े अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर मौजूद थे। इन दस्तावेजों को देखकर पीड़ितों को लगा कि उनका मकान पक्का हो गया है। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जब उन्हें कब्जा नहीं मिला, तो उन्होंने संबंधित विभाग के दफ्तर जाकर पड़ताल की। वहाँ पता चला कि ऐसे किसी भी दस्तावेज का रिकॉर्ड विभाग के पास है ही नहीं।

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जांच में खुले राज, पुलिस ने कसा शिकंजा

धोखाधड़ी का अहसास होते ही पीड़ितों ने पुलिस आयुक्त से न्याय की गुहार लगाई। अधिकारियों के निर्देश पर रावतपुर पुलिस ने मामले की प्राथमिक जांच की, जिसमें ठगी की पुष्टि हुई। थाना प्रभारी ने बताया कि दो नामजद और तीन अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की सुसंगत धाराओं (धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करना) के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।

पुलिस की चेतावनी: बिचौलियों से रहें दूर

रावतपुर पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी सरकारी योजना के लिए केवल आधिकारिक कार्यालयों या जन सुविधा केंद्रों (CSC) पर ही संपर्क करें। किसी भी व्यक्ति को कैश में पैसा न दें और न ही बिना जांचे किसी प्राइवेट व्यक्ति से आवंटन पत्र स्वीकार करें।

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