कानपुर। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कानपुर में महाशिवरात्रि का पर्व केवल भक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘स्वदेशी’ के उत्सव में भी तब्दील हो गया। बृजेंद्र स्वरूप पार्क में आयोजित मंडलस्तरीय खादी एवं ग्रामोद्योग प्रदर्शनी में रविवार को रिकॉर्ड भीड़ दर्ज की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र ‘खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन’ को चरितार्थ करते हुए युवाओं और महिलाओं ने खादी परिधानों के प्रति जबरदस्त उत्साह दिखाया।
खादी बनी ‘स्टाइल स्टेटमेंट’, युवाओं में दिखा क्रेज
कभी केवल बुजुर्गों की पसंद मानी जाने वाली खादी अब युवाओं के लिए नया ‘स्टाइल स्टेटमेंट’ बन गई है। प्रदर्शनी में पहुंचे युवाओं ने खादी के जैकेट, कुर्ते और मॉडर्न कट्स वाले शर्ट की जमकर खरीदारी की। प्रदर्शनी में 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहाँ कश्मीर की पश्मीना शॉल से लेकर राजस्थान के हर्बल उत्पाद और उत्तर प्रदेश की खास सिल्क साड़ियाँ उपलब्ध हैं। ग्राहकों का कहना है कि खादी अब न केवल आरामदायक है, बल्कि फैशनेबल भी हो गई है।
सांसद और गणमान्य नागरिकों ने बढ़ाया उत्साह
प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे स्थानीय सांसद ने कारीगरों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन खादी को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाना है। उन्होंने स्टॉल्स पर जाकर ग्रामीण अंचलों से आए बुनकरों से बातचीत की और उनके हुनर की सराहना की। सांसद ने जोर देकर कहा कि जब हम खादी खरीदते हैं, तो उसका सीधा लाभ हमारे देश के गरीब बुनकर को मिलता है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भक्ति और बाजार का अद्भुत संगम
महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रदर्शनी परिसर का माहौल पूरी तरह शिवमय नजर आया। शाम के समय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहाँ स्थानीय कलाकारों ने ‘हर-हर महादेव’ और ‘शिव तांडव’ जैसे भजनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्कूली बच्चों को सम्मानित भी किया गया।
कारीगरों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
प्रदर्शनी में भाग ले रहे बुनकरों और ग्रामोद्योग संचालकों ने बताया कि इस बार बिक्री उम्मीद से कहीं अधिक रही है। खादी वस्त्रों के साथ-साथ यहाँ मिलने वाले शुद्ध शहद, जैविक मसाले और हाथ से बने साबुन की भी भारी मांग रही। “वोकल फॉर लोकल” की गूंज यहाँ साफ तौर पर महसूस की जा सकती है।
