आगरा |
उत्तर प्रदेश के आगरा में अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। गुरुवार तड़के थाना ट्रांस यमुना क्षेत्र में हुए एक भीषण एनकाउंटर में राज चौहान हत्याकांड का मुख्य आरोपी अरबाज खान उर्फ मंसूरी मारा गया। इस मुठभेड़ के दौरान आरोपी की ओर से की गई फायरिंग में एक पुलिस आरक्षी (कांस्टेबल) भी घायल हुआ है, जबकि दो अधिकारियों की बुलेटप्रूफ जैकेट ने उनकी जान बचाई।
क्या था मामला? (पृष्ठभूमि)
बीती 23 जनवरी 2026 की रात को आगरा के ट्रांस यमुना क्षेत्र में राज चौहान नाम के एक युवक की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात ने शहर में सनसनी फैला दी थी। पुलिस उपायुक्त (नगर) सैय्यद अली अब्बास के नेतृत्व में घटना के खुलासे के लिए कुल 9 विशेष टीमों का गठन किया गया था। जांच के दौरान अरबाज खान उर्फ मंसूरी का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया था।
पिस्तौल छीनकर भागने की कोशिश और एनकाउंटर
पुलिस ने आरोपी अरबाज खान को गिरफ्तार कर लिया था। गुरुवार सुबह पुलिस टीम उसे वारदात में इस्तेमाल किए गए तमंचे की बरामदगी के लिए टेढ़ी बगिया क्षेत्र स्थित कांशीराम आवास के पास ले गई थी। इसी दौरान अरबाज ने शातिर चाल चलते हुए एक उपनिरीक्षक (SI) की सरकारी पिस्टल छीन ली और पुलिस पार्टी पर ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की।
जवाबी कार्रवाई में मारा गया अपराधी
पुलिस टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला और आरोपी को सरेंडर करने की चेतावनी दी, लेकिन उसने फायरिंग जारी रखी। आरोपी की गोली लगने से आरक्षी मनोज कुमार घायल हो गए। थाना प्रभारी ट्रांस यमुना हरेन्द्र कुमार और थाना प्रभारी कोतवाली भानु प्रताप की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी गोलियां लगीं। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई जवाबी फायरिंग में अरबाज खान को दो गोलियां (एक छाती पर और एक पैर में) लगीं।
उसे तुरंत इलाज के लिए जिला अस्पताल और फिर एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अपराधिक इतिहास और पुलिस की सतर्कता
पुलिस के अनुसार, अरबाज खान का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। वह इलाके में दहशत का पर्याय बना हुआ था। पुलिस की इस कार्रवाई से अपराधियों में खौफ का माहौल है। वर्तमान में घायल सिपाही मनोज कुमार का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
