कोलकाता/मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले अजित पवार के असामयिक निधन ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। जहां एक तरफ देश इस दुखद खबर से उबरने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान ने देश की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। ममता बनर्जी ने इस विमान हादसे को सामान्य दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसकी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
हादसे पर ममता बनर्जी का संदेह
कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “अजित पवार एक अनुभवी और मजबूत नेता थे। उनका इस तरह एक विमान हादसे में चले जाना कई अनसुलझे सवाल खड़े करता है। जिस तरह से विमान में आग लगी और वह क्रैश हुआ, वह संदिग्ध लगता है। देश की जनता को सच जानने का हक है।” उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी और कद्दावर नेताओं के साथ ही ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं?
‘सुप्रीम कोर्ट ही दिला सकता है न्याय’
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उन्हें वर्तमान जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए। उन्होंने कहा, “जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले की निगरानी नहीं करेगा, तब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं होगा।”
महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल
अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र में पहले से ही नेतृत्व का संकट गहरा गया है, अब ममता बनर्जी के इस बयान ने राज्य की राजनीति में आग में घी डालने का काम किया है। एनसीपी (NCP) के कार्यकर्ताओं में भी इस बयान के बाद आक्रोश और संदेह देखा जा रहा है। कई स्थानीय नेताओं ने भी अब सुर में सुर मिलाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग शुरू कर दी है।
हादसे की भयावहता और शुरुआती रिपोर्ट
बता दें कि बुधवार सुबह बारामती के पास अजित पवार का चार्टर्ड विमान लैंडिंग से कुछ मिनट पहले क्रैश हो गया था। विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। नागरिक उड्डयन विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में तकनीकी खराबी की बात कही गई है, लेकिन ‘साजिश’ के एंगल ने अब इस मामले को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है।
