कानपुर नगर। जनपद में शस्त्र लाइसेंस की वरासत को लेकर बना तीन वर्षों का गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। वर्ष 2022, 2023 और 2024 में जहां एक भी वरासत लाइसेंस जारी नहीं किया गया था, वहीं वर्तमान जिला प्रशासन ने कड़ाके की प्रशासनिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए इस वर्ष अब तक 174 प्रकरणों का सफल निस्तारण कर दिया है। प्रशासन के इस कदम से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है जो अपने पूर्वजों की स्मृतियों और धरोहर को सहेजने के लिए वर्षों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे।
जनता दर्शन से समाधान का निकला रास्ता
इस उपलब्धि की नींव जिलाधिकारी के ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में पड़ी। बड़ी संख्या में आवेदक अपनी पीड़ा लेकर डीएम के समक्ष पहुँचे थे। उन्होंने बताया कि परिजनों के निधन के बाद उनके शस्त्रों को जमा कर दिया गया था, लेकिन वरासत की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही थी। जिलाधिकारी ने इन मामलों को ‘पारिवारिक धरोहर’ से जुड़ी भावनाओं के रूप में देखा और फाइलों की धूल झाड़ने के निर्देश दिए।
किसके हिस्से आए कौन से शस्त्र?
प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, निस्तारित किए गए 174 मामलों में सुरक्षा और शौक दोनों का संगम दिखा।
- रिवाल्वर एवं पिस्टल: 91 मामलों में छोटे हथियारों की वरासत सौंपी गई।
- गन (DBBL/SBBL): 57 मामलों का निस्तारण हुआ।
- एनपी बोर राइफल: 26 मामलों में लाइसेंस जारी किए गए।
रिश्तों की विरासत: पिता से पुत्र और ससुर से बहू तक पहुँचा हक
वरासत प्रक्रिया में रिश्तों का आधार काफी व्यापक रहा। सबसे अधिक मामले पिता से संतान को हस्तांतरण के रहे।
- पिता से पुत्र/पुत्री: 128 मामले
- पति से पत्नी: 24 मामले
- बाबा से पौत्र: 16 मामले
- ससुर से बहू: 03 मामले
- भाई से भाई: 03 मामले
डेटा बॉक्स: एक नज़र में कानपुर की शस्त्र वरासत स्थिति
| वर्ष | जारी वरासत लाइसेंस |
|---|---|
| 2022 | 0 |
| 2023 | 0 |
| 2024 | 0 |
| 2025 (अब तक) | 174 |
लाभार्थियों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
लाइसेंस प्राप्त करने वाले विवेक पाठक ने बताया कि उनके पिता के निधन के बाद फाइल अटकी हुई थी, लेकिन इस वर्ष पारदर्शी प्रक्रिया से उनका काम हो गया। वहीं, प्रीति सिंह ने पति के शस्त्र की वरासत मिलने पर प्रशासन की समयबद्ध कार्यप्रणाली की सराहना की।
“शासन की प्राथमिकता है कि नागरिकों की वैधानिक प्रक्रियाएं अनावश्यक न लटकें। शस्त्र केवल हथियार नहीं, बल्कि कई परिवारों की भावनात्मक धरोहर भी होते हैं। हमने नियमों के दायरे में रहकर पारदर्शिता के साथ इनका निस्तारण किया है।” > — जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी, कानपुर नगर
