बांग्लादेश चुनाव 2026: क्या 'कट्टरपंथ' छोड़ 'लोकतंत्र' की राह पर है जमात? भारत और हिंदुओं पर किए ये बड़े वादे! - NewsKranti

बांग्लादेश चुनाव 2026: क्या ‘कट्टरपंथ’ छोड़ ‘लोकतंत्र’ की राह पर है जमात? भारत और हिंदुओं पर किए ये बड़े वादे!

12 फरवरी 2026 को होने वाले बांग्लादेश आम चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी के बदले सुर चर्चा में हैं। पार्टी ने भारत के साथ 'सम्मानजनक' रिश्तों और हिंदू समुदाय की भागीदारी का भरोसा दिया है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • भारत से संबंध: आपसी सम्मान के आधार पर भारत के साथ मधुर और सहयोगात्मक रिश्ते।
  • अल्पसंख्यक अधिकार: हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को कैबिनेट में जगह और सुरक्षा का वादा।
  • रोहिंग्या संकट: अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर रोहिंग्याओं की सुरक्षित वापसी का प्रयास।
  • जुलाई आंदोलन का सम्मान: शहीद हुए छात्रों के परिवारों का पुनर्वास और 'जुलाई चार्टर' को कानूनी रूप देना।
  • भ्रष्टाचार मुक्त शासन: सरकारी नौकरियों में केवल मेरिट के आधार पर भर्ती और 100% पारदर्शिता।

ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आने वाला है। 12 फरवरी को होने वाले ऐतिहासिक आम चुनाव से पहले देश की सबसे बड़ी इस्लामिक कट्टरपंथी पार्टी कही जाने वाली जमात-ए-इस्लामी ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। इसे “पीपुल्स मेनिफेस्टो” का नाम दिया गया है।

हैरानी की बात यह है कि जिस जमात पर हमेशा भारत विरोधी होने का ठप्पा लगा रहता था, उसने इस बार अपने एजेंडे में भारत के साथ रचनात्मक और सहयोगात्मक संबंधों को प्राथमिकता दी है। पार्टी ने साफ किया है कि वह “आपसी सम्मान और निष्पक्षता” के आधार पर भारत के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते बनाना चाहती है।

भारत के लिए ‘दोस्ती’ का हाथ, पड़ोसी देशों पर नजर

जमात-ए-इस्लामी के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान ने ढाका के एक आलीशान होटल में राजनयिकों और नागरिक समाज के सदस्यों के सामने यह मेनिफेस्टो पेश किया। इसमें न केवल भारत बल्कि नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों के साथ भी मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंधों की वकालत की गई है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना की आवामी लीग के बैन होने के बाद जमात अब अपनी छवि को “उदारवादी” दिखाने की कोशिश कर रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे स्वीकार्यता मिल सके।

हिंदू वोटर्स और अल्पसंख्यकों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ का वादा

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमलों को लेकर अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। इसे देखते हुए जमात ने अपने घोषणापत्र में वादा किया है कि उनकी सरकार बनने पर:

  • कैबिनेट में धार्मिक अल्पसंख्यकों (हिंदुओं और अन्य) को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
  • अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • देश की विविधता को दर्शाने के लिए मंत्रिमंडल में हर वर्ग की भागीदारी होगी।

महिलाओं पर ‘विवाद’ और अब ‘वादा’

हाल ही में डॉ. शफीकुर रहमान की एक कथित सोशल मीडिया पोस्ट पर भारी विवाद हुआ था, जिसमें कामकाजी महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। हालांकि, पार्टी ने इसे “अकाउंट हैक” होने की साजिश बताया। अब डैमेज कंट्रोल करते हुए घोषणापत्र में वादा किया गया है कि होनहार युवा महिलाओं को सरकार में महत्वपूर्ण पद दिए जाएंगे।

क्यों अहम है यह चुनाव?

जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश की सत्ता से शेख हसीना की विदाई हुई थी। अब लगभग डेढ़ साल बाद होने वाले इन चुनावों में आवामी लीग बाहर है, जिससे जमात-ए-इस्लामी और बीएनपी (BNP) के बीच सीधा मुकाबला देखा जा रहा है।

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