मुख्य बिंदु :
- गिरफ्तारी: थाना कर्नलगंज और सर्विलांस सेंट्रल ज़ोन की संयुक्त कार्रवाई।
- इनामी अपराधी: गिरफ्तार अभियुक्तों पर था 25-25 हजार रुपये का इनाम।
- बरामदगी: ठगी के 5 लाख रुपये नकद बरामद।
- ठगी का तरीका: रांगे (सस्ती धातु) पर चांदी की परत चढ़ाकर नकली सिल्लियां बेचना।
- पुराना रिकॉर्ड: कोटा, जयपुर, ग्वालियर और दिल्ली में भी दे चुके हैं वारदातों को अंजाम।
कानपुर नगर : कानपुर पुलिस ने ज्वैलरी व्यवसायियों के साथ शातिर तरीके से ठगी करने वाले एक बड़े अंतर-जनपदीय गिरोह के दो मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। गिरफ्तार किए गए दोनों अभियुक्त आगरा के रहने वाले हैं और इन पर पुलिस ने 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। पुलिस ने इनके पास से ठगी से कमाए गए 5 लाख रुपये नकद भी बरामद किए हैं।
धनतेरस की भीड़ का उठाया फायदा: ऐसे देते थे घटना को अंजाम
डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यह गैंग बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करता था। गैंग के सदस्य ‘रांगा’ (एक सस्ती धातु) पर चांदी की पॉलिश कर उसे असली चांदी की सिल्ली जैसा रूप देते थे। 18 अक्टूबर 2025 को इस गैंग ने कर्नलगंज की एक प्रतिष्ठित दुकान को निशाना बनाया था।
ठगों ने दुकानदार को झांसा दिया कि वे पुरानी चांदी बेचकर सोना खरीदना चाहते हैं। धनतेरस के कारण दुकान में भारी भीड़ थी, जिसका फायदा उठाकर उन्होंने नकली सिल्लियां थमा दीं। दुकानदार ने भीड़ के दबाव में सिल्लियों को काटकर चेक नहीं किया और बदले में उन्हें सोने के सिक्के और चेन दे दी।
गिरफ्तार अभियुक्तों का काला चिट्ठा
पुलिस की गिरफ्त में आए ठगों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- देवेंद्र गुप्ता उर्फ देवा (33 वर्ष): आगरा का निवासी। इसके खिलाफ आगरा और कानपुर में एनडीपीएस, जुआ और धोखाधड़ी के कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
- आकाश अग्रवाल उर्फ राजा (32 वर्ष): यह भी आगरा का रहने वाला है और धोखाधड़ी की वारदातों में माहिर है।
इनके दो साथी, मोहित वर्मा और नंदू शाक्य, पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं। यह गैंग फर्जी आधार कार्ड और फर्जी सिम कार्ड का उपयोग करता था ताकि पुलिस की पकड़ से दूर रह सके।
सिर्फ यूपी नहीं, कई राज्यों में फैला है नेटवर्क
पूछताछ के दौरान यह खुलासा हुआ कि यह गैंग केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि राजस्थान (कोटा, जयपुर), मध्य प्रदेश (ग्वालियर) और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भी ज्वैलर्स को करोड़ों का चूना लगा चुका है। इनका काम करने का तरीका इतना सटीक था कि अनुभवी ज्वैलर्स भी इनके झांसे में आ जाते थे। गैंग के सदस्य पहले इलाके की रेकी करते थे, किराए के ऑटो का इस्तेमाल करते थे और दुकान के अंदर व बाहर अलग-अलग सदस्य तैनात रहते थे।
पुलिस की व्यापारियों से अपील
डीसीपी सेंट्रल ने शहर के ज्वैलर्स और अन्य व्यापारियों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति से कीमती धातुओं का लेन-देन करते समय पूरी सावधानी बरतें। पुराने माल को गलाकर या काटकर उसकी शुद्धता की जांच अनिवार्य रूप से करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पुलिस और सर्विलांस टीम को सूचित करें।
इस सफल ऑपरेशन में कर्नलगंज प्रभारी निरीक्षक विनीत कुमार और सेंट्रल सर्विलांस सेल के प्रभारी लोकेंद्र सिंह की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
