बेंगलुरु:
कर्नाटक में बाइक टैक्सी चलाने वाले लाखों चालकों और सस्ती सवारी की तलाश करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। कर्नाटक हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा बाइक टैक्सी सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंध को पूरी तरह से हटा दिया है। यह फैसला सिद्धारमैया सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिसने पिछले साल इन सेवाओं को अवैध घोषित कर दिया था।
अदालत का फैसला और तर्क
चीफ जस्टिस विभू बखरू और जस्टिस सीएम जोशी की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों द्वारा दायर अपीलों को स्वीकार करते हुए यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी अनुमतियों के अधीन, मोटरसाइकिलों का उपयोग ‘ट्रांसपोर्ट वाहनों’ के रूप में किया जा सकता है।
अदालत ने कहा, “राज्य सरकार केवल इस आधार पर टैक्सी पंजीकरण से इनकार नहीं कर सकती कि वह वाहन एक मोटरसाइकिल है। टैक्सी मालिकों को कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन करने का अधिकार है और सरकार को मौजूदा कानूनों के तहत इन पर विचार करना होगा।”
क्या था विवाद?
कर्नाटक सरकार ने जून 2024 में बाइक टैक्सी सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, जिसका आधार स्पष्ट नियामक ढांचे की कमी को बताया गया था। इसके खिलाफ एग्रीगेटर्स ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दलील दी कि इस बैन से लाखों लोगों की आजीविका पर संकट आ गया है। अब हाई कोर्ट ने अप्रैल 2025 के उस आदेश को खारिज कर दिया है जिसने प्रतिबंध को बरकरार रखा था।
आगे की राह
अब बाइक टैक्सी ऑपरेटर और एग्रीगेटर्स नए लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह इन आवेदनों पर कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई करे। इस फैसले से बेंगलुरु जैसे शहरों में ट्रैफिक की समस्या से जूझ रहे लोगों को एक किफायती विकल्प वापस मिलने की उम्मीद है।
