नई दिल्ली | विशेष संवाददाता भारत के करीब 10 करोड़ स्मोकर्स के लिए फरवरी का महीना जेब पर भारी पड़ने वाला है। केंद्र सरकार ने तंबाकू उत्पादों और सिगरेट पर नई एक्साइज ड्यूटी लागू करने का फैसला किया है, जो 1 फरवरी से प्रभावी हो जाएगी। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सिगरेट की लंबाई के आधार पर उस पर लगने वाले टैक्स की गणना की जाएगी। इस फैसले का सीधा असर सिगरेट, गुटखा और पान मसाला की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा।
सिगरेट की लंबाई तय करेगी उसकी कीमत
सरकार ने इस बार टैक्स ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। नई दरों के अनुसार, सिगरेट जितनी लंबी होगी, उस पर टैक्स उतना ही ज्यादा लगेगा।
- 65mm तक की छोटी सिगरेट: प्रति स्टिक करीब 2.05 रुपये से 2.10 रुपये की बढ़ोतरी।
- 65mm से 70mm तक (Medium): प्रति स्टिक 3.60 से 4 रुपये तक का इजाफा।
- 70mm से 75mm (Premium/Long): प्रति स्टिक 5.40 रुपये या उससे अधिक का बोझ।
- नॉन-फिल्टर सिगरेट: इन पर भी एक्साइज ड्यूटी की दरें बढ़ा दी गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैक्स बढ़ोतरी के बाद 18 रुपये में मिलने वाली एक सिगरेट अब 21 से 22 रुपये तक पहुंच सकती है।
GST के ऊपर लगेगी अतिरिक्त ड्यूटी
वर्तमान में तंबाकू उत्पादों पर 28% GST और कंपनसेशन सेस लगता है, जिसे अब संशोधित कर 40% GST के दायरे में लाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत, 1 फरवरी से कंपनसेशन सेस को हटाकर उसकी जगह ‘हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस’ और ‘अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी’ लगाई जाएगी।
तंबाकू तस्करी बढ़ने की आशंका
बाजार विशेषज्ञों और इंडस्ट्री बॉडीज ने चेतावनी दी है कि वैध सिगरेट पर टैक्स बढ़ने से अवैध तंबाकू व्यापार और तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है। जब वैध सिगरेट महंगी होती है, तो उपभोक्ता अक्सर सस्ते और बिना टैक्स वाले विदेशी ब्रांड्स की ओर रुख करते हैं, जिससे सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचता है।
क्यों उठाया सरकार ने यह कदम?
सरकार का प्राथमिक उद्देश्य राजस्व जुटाने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार, तंबाकू उत्पादों पर कम से कम 75% टैक्स होना चाहिए ताकि लोग इसके सेवन से हतोत्साहित हों। भारत में वर्तमान में कुल टैक्स करीब 53% है, जिसे नई ड्यूटी के जरिए बढ़ाया जा रहा है।
