गुना (मध्य प्रदेश) :- गौरतलब है कि आज डब्ल्यूएचओ एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ‘कोरोना के लेकर बढ़ते भेदभाव’ विषय पर रखी गई थी। जिसमें सभी धर्मों एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रमुखों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की गई।
व कोरोना के चलते बढ़ते हुए भेदभाव को किस प्रकार खत्म किया जाए और इस भेदभाव के क्या क्या नुकसान हो सकते हैं। इन विषयों पर चर्चा की गई, सभी धर्म गुरुओं एवं संस्था के प्रमुखों ने यहां अपने विचार रखे।
वहीं गुना शहर काजी नुरुल्लाह युसुफ़ज़ई ने इस विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि इस्लाम हमेशा से भेदभाव को मिटाने की शिक्षा देता आया है। फिर चाहे वह धार्मिक भेदभाव हो, सामाजिक भेदभाव हो।
जातिगत भेदभाव हो, नस्लीय भेदभाव हो या फिर किसी बीमार व्यक्ति के साथ होने वाला भेदभाव हो, उन्होंने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने एक कोड़ी व्यक्ति को गले लगा कर अपने समाज को यह संदेश दिया था कि बीमार व्यक्ति से किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए।
वही उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा जो सोशल डिस्टेंसिंग की अपील देशवासियों से की गई थी, लोगों ने उसे सोशल बायकाट बना दिया है, लगातार देखने में आ रहा है कि कोविड-19 के मरीजों से लोग सोशल बायकाट करते हुए नजर आ रहे हैं।
कई जगहों से सूचनाएं मिल रही है कि मरीज के सही होने के बाद भी उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप देश में कोविड-19 के बाद आत्महत्याओं का दौर भी जारी है, जिसके चलते आए दिन किसी ना किसी देशवासी की जान आत्महत्या के कारण जा रही है।
आगे बात रखते हुए श्री यूसुफजई ने कहा की देशभर के अंदर मुस्लिम समाज के धर्मगुरुओं द्वारा नमाज़ सोशल डिस्टेंसिंग के साथ अदा कराई जा रही हैं ताकि किसी भी तरीके से कोरोना को फैलने से रोका जाए और कोई भी नमाज़ी इसको फैलाने का कारण न बने, अंत में श्री यूसुफजई ने कहा।
कि सिर्फ कोरोना के भेदभाव को ही नहीं बल्कि समाज में और भी जो अन्य तरह के भेदभाव लोगों के साथ किए जा रहे हैं उसे मिटाने के लिए सबसे अहम और जरूरी चीज़ यह है कि जिसके साथ भेदभाव हो रहा है उसके साथ वो लोग भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं जिनके साथ कभी भेदभाव हुआ ही न हो, तब कहीं जाकर भेदभाव मिटने की एक कामयाब कोशिश हमारे द्वारा की जा सकती है।
रिपोर्ट इदरीस मंसूरी