पाकिस्तान के बलूचिस्तान में भारी बवाल: हजारों सरकारी कर्मचारियों का सड़क पर कब्जा, ‘डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस’ की मांग को लेकर आर-पार की जंग – NewsKranti

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में भारी बवाल: हजारों सरकारी कर्मचारियों का सड़क पर कब्जा, ‘डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस’ की मांग को लेकर आर-पार की जंग

पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत इस समय भीषण आंतरिक कलह और विरोध प्रदर्शनों की आग में झुलस रहा है। वेतन में भारी भेदभाव और महंगाई के खिलाफ बलूचिस्तान के हजारों सरकारी कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं। 'डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस' (DRA) की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब 'जेल भरो' आंदोलन में तब्दील होने की कगार पर है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • प्रमुख मांग: वेतन विसंगति दूर करने के लिए 30% डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस (DRA) लागू करना।
  • नेतृत्व: बलूचिस्तान ग्रैंड एलायंस (BGA) के तहत हजारों कर्मचारी लामबंद।
  • सरकारी कार्रवाई: 50 से अधिक गिरफ्तार, 38 प्रोफेसर निलंबित, इंटरनेट सेवाएं ठप।
  • आर्थिक प्रभाव: प्रमुख राजमार्गों के बंद होने से ग्वादर और कराची के बीच व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित।
  • असमानता का आरोप: गवर्नर और मुख्यमंत्री कार्यालय के कर्मचारियों को अधिक वेतन मिलने पर नाराजगी।

क्वेटा/इस्लामाबाद:

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पिछले कई महीनों से चल रहा सरकारी कर्मचारियों का असंतोष अब एक बड़े जनांदोलन का रूप ले चुका है। ‘बलूचिस्तान ग्रैंड एलायंस’ (BGA) के आह्वान पर हजारों कर्मचारियों ने क्वेटा के ‘रेड ज़ोन’ और मुख्य राजमार्गों को जाम कर दिया है। उनकी मुख्य मांग 30 प्रतिशत ‘डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस’ (DRA) को लागू करना है, जो पाकिस्तान के अन्य प्रांतों जैसे पंजाब और सिंध में पहले से ही दिया जा रहा है।

वेतन में भेदभाव: आखिर क्यों भड़का गुस्सा?

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि बलूचिस्तान सरकार एक ही ग्रेड के कर्मचारियों के बीच वेतन में भारी भेदभाव कर रही है। एलायंस के प्रमुख अब्दुल कुदूस काकर ने बताया कि मुख्यमंत्री सचिवालय, गवर्नर हाउस और हाई कोर्ट जैसे विशेषाधिकार प्राप्त संस्थानों के कर्मचारियों को अन्य विभागों की तुलना में कहीं अधिक वेतन मिल रहा है। उन्होंने कहा, “जब महंगाई पूरे देश के लिए एक समान है, तो बलूचिस्तान के बाकी सरकारी कर्मचारियों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?”

सड़कों पर संग्राम और पुलिस की बर्बरता

विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। क्वेटा के उच्च सुरक्षा वाले रेड ज़ोन को कंटेनर लगाकर सील कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और दर्जनों प्रोफेसरों व लेक्चरर्स को निलंबित कर दिया गया है।

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आंदोलन के पहले चरण में कर्मचारियों ने क्वेटा को कराची, तफ़्तान, ग्वादर और सिंध से जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्गों को ब्लॉक कर दिया, जिससे प्रांत का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कट गया। हजारों ट्रक और बसें सड़कों पर फंसी हुई हैं, जिससे आम जनता को भी भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

इंटरनेट सेवा बंद, सूचनाओं पर पहरा

हालात की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने क्वेटा और आसपास के इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया है। प्रशासन का तर्क है कि यह सुरक्षा की दृष्टि से उठाया गया कदम है, लेकिन नागरिक संगठनों ने इसे लोकतंत्र की हत्या और कर्मचारियों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है।

‘जेल भरो’ आंदोलन की चेतावनी

बलूचिस्तान ग्रैंड एलायंस ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें तुरंत नहीं मानी गईं, तो वे पूरे प्रांत में सरकारी कार्यालयों को पूरी तरह बंद कर देंगे और ‘जेल भरो’ आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि निलंबन और गिरफ्तारियों से आंदोलन थमने वाला नहीं है, बल्कि यह और अधिक तीव्र होगा।

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