कानपुर। कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 (सीएसए – बर्रा-8) के लिए तैयार पहली मेट्रो ट्रेन की अनलोडिंग आज सीएसए परिसर स्थित निर्माणाधीन डिपो में सुरक्षित रूप से की गई। लगभग 40 टन वजनी अत्याधुनिक कोचों को विशेष क्रेनों की सहायता से सावधानीपूर्वक ट्रैक पर उतारा गया। विदित हो कि कानपुर मेट्रो की प्रत्येक ट्रेन में 3 कोच होते हैं। कॉरिडोर-2 के लिए ऐसी कुल 10 ट्रेनों की आपूर्ति प्रस्तावित है, और यह उनमें से पहली डिलीवरी है।
बता दें कि कानपुर मेट्रो ट्रेनों को ‘मेक इन इंडिया‘ परिकल्पना के तहत गुजरात के सावली स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में तैयार किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि कॉरिडोर-1 के लिए आवश्यक सभी 29 मेट्रो ट्रेनें गुरूदेव चौराहा स्थित मेट्रो डिपो में पहले ही आ चुकी हैं।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने टीम को बधाई देते हुए कहा, “कानपुर मेट्रो कॉरिडोर-2 (सीएसए-बर्रा-8) के लिए ट्रेनों का आगमन एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह निकट भविष्य में शहर के सार्वजनिक परिवहन में होने वाले सकारात्मक परिवर्तन की झलक प्रस्तुत करता है। आने वाले समय में इस ट्रेन के साथ डिपो में परिचालन संबंधी विभिन्न परीक्षण किए जाएंगे। इसके लिए डिपो में ट्रैक निर्माण व थर्ड रेल इंस्टॉलेशन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। ट्रेन की टेस्टिंग के लिए आवश्यक बिजली आपूर्ति हेतु डिपो में 33 केवी ऑग्ज़िलरी-कम-ट्रैक्शन सब-स्टेशन तैयार है। पहले प्वाइंट मशीन के इंस्टॉलेशन के साथ सिग्नलिंग कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। कानपुर के कॉरिडोर-1 की सभी 29 मेट्रो ट्रेनें पहले ही प्राप्त हो चुकी हैं। दोनों कॉरिडोरों के लिए कुल 39 ट्रेनें उपलब्ध होंगी, जिनमें प्रत्येक में 3-3 कोच होंगे।”
कानपुर मेट्रो ट्रेन की विशेषताएं:
- ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना के साथ कानपुर मेट्रो की ट्रेनें पूरी तरह से ’मेक इन इंडिया’ हैं और इन्हें गुजरात में वड़ोदरा के निकट स्थित सावली में बने प्लांट में तैयार किया गया है। ऑटोमैटिक ट्रेन ऑपरेशन को ध्यान में रखते हुए ये ट्रेनें ’संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण प्रणाली’ से चलती हैं।
- ये ट्रेनें ’रीजेनरेटिव ब्रेकिंग’ तकनीक से ऊर्जा संरक्षण की दक्षता के साथ-साथ, वायु-प्रदूषण को कम करने के लिए अत्याधुनिक ’प्रॉपल्शन सिस्टम’ से भी लैस हैं। इन ट्रेनों में कार्बन-डाई-ऑक्साइड सेंसर आधारित एयर कंडीशनिंग सिस्टम है, जो ट्रेन में मौजूद यात्रियों की संख्या के हिसाब से काम करता है, जिससे ऊर्जा की बचत होती है।
- कानपुर मेट्रो की ट्रेनों की यात्री क्षमता लगभग 974 यात्रियों की है। इनकी डिज़ाइन स्पीड 90 किमी./घंटा और ऑपरेशन स्पीड 80 किमी./घंटा तक है।
- ट्रेन के पहले और आखिरी कोच में दिव्यांगजनों की व्हीलचेयर के लिए अलग से जगह है। व्हीलचेयर के स्थान के पास ‘लॉन्ग स्टॉप रिक्वेस्ट बटन’ है, जिसे दबाकर दिव्यांगजन ट्रेन ऑपरेटर को अधिक देर तक दरवाज़ा खुला रखने के लिए सूचित कर सकते हैं ताकि वे आराम से ट्रेन से उतर सकें।
- यात्री आपात स्थिति में मेट्रो ट्रेन के अंदर लगे पैसेंजर एमरजेंसी इंटरकॉम (पीईआई) या पैनिक बटन का उपयोग कर सीधे ट्रेन ऑपरेटर से संपर्क स्थापित कर सकते हैं। इससे यात्री का लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज सीधे ट्रेन ऑपरेटर के पास मौजूद मॉनीटर पर दिखाई देगा।
- इन ट्रेनों को अत्याधुनिक फायर और क्रैश सेफ्टी के मानकों के आधार पर डिजाइन किया गया है। ट्रेनों में फायर एस्टिंग्यूशर (अग्निशमन यंत्र), स्मोक डिटेक्टर्स और सीसीटीवी कैमरे आदि भी लगे हैं। इसके अलावा हर ट्रेन में 56 यूएसबी चार्जिंग पॉइंट्स और इन्फोटेनमेंट के लिए 36 एलसीडी पैनल्स भी हैं।
- कानपुर की मेट्रो ट्रेनें थर्ड रेल यानी पटरियों के समानान्तर चलने वाली तीसरी रेल से ऊर्जा प्राप्त करती हैं, इसलिए इसमें खंभों और तारों के सेटअप की आवश्यकता नहीं होती और बुनियादी ढाँचा बेहतर और सुंदर दिखाई देता है।