Kanpur CSA Protest 2026 CSA यूनिवर्सिटी में भारी बवाल: छात्रों ----

कानपुर: UGC बिल के खिलाफ बाहर आया छात्रों का उबाल, CSA में छात्रों ने फूंका पुतला

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ कानपुर के सीएसए विश्वविद्यालय में छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है। छात्रों ने कैंपस में नारेबाजी करते हुए पुतला फूंका और बिल को वापस लेने की मांग की।

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ख़बर एक नज़र में :
  • सीएसए विश्वविद्यालय के छात्रों ने यूजीसी बिल के खिलाफ किया प्रदर्शन।
  • नये नियमों को शिक्षा का निजीकरण और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बताया।
  • यूनिवर्सिटी प्रशासन के जरिए सरकार तक अपनी नाराजगी पहुँचाने का संकल्प।
  • विरोध प्रदर्शन के चलते कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई।

कानपुर। शहर के प्रतिष्ठित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) के कैंपस में बुधवार को माहौल उस समय गरमा गया जब भारी संख्या में छात्र यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए बिल के विरोध में सड़कों पर उतर आए। छात्रों ने इस बिल को ‘काला कानून’ करार देते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कैंपस के मुख्य गेट पर पुतला दहन कर अपना रोष प्रकट किया।

क्यों भड़के हैं छात्र?

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि यूजीसी द्वारा प्रस्तावित नए नियमों से उच्च शिक्षा का व्यवसायीकरण और निजीकरण बढ़ेगा। छात्रों के अनुसार, यह बिल न केवल स्वायत्तता को खतरे में डालता है, बल्कि मध्यम और निम्न वर्ग के छात्रों के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद करने जैसा है। छात्र नेताओं ने कहा कि नए नियमों के लागू होने से शोध (Research) और छात्रवृत्ति (Scholarship) पर बुरा असर पड़ेगा, जो कृषि विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के लिए घातक है।

कैंपस में जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी

बुधवार दोपहर छात्र परिषद के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र लाइब्रेरी रोड से होते हुए प्रशासनिक भवन तक पहुँचे। हाथों में तख्तियां लिए छात्र “यूजीसी बिल वापस लो” और “छात्र एकता जिंदाबाद” के नारे लगा रहे थे। सुरक्षा की दृष्टि से मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस छात्र विरोधी नीति को तुरंत वापस नहीं लिया, तो वे दिल्ली कूच करेंगे और पूरे प्रदेश में इस आंदोलन को फैलाएंगे।

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शिक्षा जगत में बिल को लेकर बहस

केवल कानपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी इस बिल को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी के नए ढांचे से विश्वविद्यालयों की फंडिंग और आंतरिक प्रबंधन में बड़े बदलाव आएंगे। सीएसए के छात्रों का तर्क है कि कृषि क्षेत्र में प्रयोग और शोध के लिए सरकारी सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, लेकिन यह बिल निजी संस्थानों को अधिक बढ़ावा दे रहा है।

आगे की रणनीति

छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति के माध्यम से उच्चाधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा है। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि यह केवल सांकेतिक प्रदर्शन था। यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे कक्षाओं का बहिष्कार करेंगे और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।

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