नई दिल्ली:
भारत अपनी आजादी के 75 गौरवशाली वर्षों का उत्सव ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के रूप में मनाते हुए अब ‘अमृत काल’ के स्वर्ण युग में प्रवेश कर चुका है। इस वर्ष गणतंत्र दिवस का आयोजन केवल एक सैन्य परेड नहीं, बल्कि एक विकसित भारत के संकल्प का प्रतिबिंब है।
स्वदेशी तोपों की गूँज और ‘आत्मनिर्भर’ भारत
इतिहास में पहली बार, पारंपरिक 25-पाउडर तोपों की जगह भारत में निर्मित 105-mm इंडियन फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। यह रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती ‘आत्मनिर्भरता’ का प्रतीक है। इसके साथ ही अर्जुन टैंक, नाग मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस जैसी स्वदेशी मिसाइलें दुनिया को भारत की सामरिक शक्ति का परिचय देंगी।
नारी शक्ति और अग्निवीरों का पदार्पण
परेड के मुख्य आकर्षणों में नौसेना का दस्ता होगा, जिसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर दिशा अमृत कर रही हैं। खास बात यह है कि इस मार्चिंग दस्ते में पहली बार महिला अधिकारियों के साथ ‘अग्निवीर’ भी शामिल होंगे। यह बदलते भारत की उस तस्वीर को पेश करता है जहाँ युवा शक्ति और महिला शक्ति कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र रक्षा में तत्पर हैं।
अमृत काल की ओर बढ़ते कदम
इस बार की झांकियों में ‘अमृत काल’ के विजन को प्रमुखता दी गई है। पूर्व सैनिकों की झांकी की थीम ‘संकल्प के साथ अमृत काल की ओर’ रखी गई है, जो यह दर्शाती है कि अनुभव और जोश के साथ भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है।
