कानपुर। उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने रेल यातायात को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर शनिवार और रविवार को वीआईपी ट्रेनों की लेटलतीफी ने यात्रियों की मुसीबतें बढ़ा दीं। स्थिति यह रही कि दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेन 6 घंटे देरी से पहुंची, लेकिन नियमानुसार यात्रियों को भोजन तक उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके अलावा, एलटीटी-कानपुर स्पेशल जैसी ट्रेनें 18 घंटे की देरी से चलने के कारण स्टेशन पर यात्रियों का हुजूम उमड़ पड़ा।
वंदे भारत में नियमों की अनदेखी, युवती के पिता ने की शिकायत
प्रताप साहनी नामक यात्री ने कानपुर सेंट्रल पर लिखित शिकायत दर्ज कराई है कि उनकी बेटी अश्लेषा साहनी नई दिल्ली से वाराणसी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस (22416) के कोच C-8 में सफर कर रही थी। ट्रेन अपने निर्धारित समय शाम 07:08 बजे के बजाय रात 12:44 बजे कानपुर पहुंची। शिकायत के अनुसार, नियम है कि प्रीमियम ट्रेन 3 घंटे से अधिक लेट होने पर यात्रियों को डिनर दिया जाए, लेकिन वंदे भारत में ऐसा नहीं हुआ। यात्रियों को जो स्नैक्स दिया गया, वह भी खाने लायक नहीं था। कोच अटेंडेंट ने भी यात्रियों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया।
राजधानी और तेजस का भी बुरा हाल
कोहरे की वजह से केवल वंदे भारत ही नहीं, बल्कि देश की अन्य प्रतिष्ठित ट्रेनें भी रेंगती नजर आईं। आंकड़ों के मुताबिक:
- डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी: 10 घंटे की देरी।
- सैरंग-आनंद विहार राजधानी: 07:45 घंटे की देरी।
- लखनऊ-नई दिल्ली तेजस: 06 घंटे की देरी।
- एलटीटी-कानपुर सेंट्रल स्पेशल: 18 घंटे की देरी।
- बरौनी-नई दिल्ली स्पेशल: 16 घंटे की देरी।
- श्रम शक्ति एक्सप्रेस: 06 घंटे की देरी।
स्टेशन पर गलन और ठिठुरन ने किया बेहाल
ट्रेनों की भारी लेटलतीफी के कारण कानपुर सेंट्रल और गोविंदपुरी स्टेशन पर भारी भीड़ जमा हो गई। ठंड और गलन के कारण प्रतीक्षालय (वेटिंग हॉल) फुल हो गए, जिसके चलते यात्रियों को फुटओवर ब्रिज, प्लेटफॉर्म के फर्श और पोर्टिको में रात बितानी पड़ी। सबसे ज्यादा परेशानी उन यात्रियों को हुई जो आसपास के जिलों से आकर ट्रेन पकड़ने के इंतजार में बैठे थे।
