कानपुर नगर। “विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है जब भारत के गाँव विकसित हों।” इसी उद्देश्य के साथ एकल युवा परिषद के तत्वावधान में कानपुर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीण सशक्तिकरण और समग्र (होलीस्टिक) शिक्षा के महत्व पर गंभीर विमर्श हुआ।
परिवर्तन का केंद्र: एकल शिक्षक विद्यालय
कार्यक्रम में चर्चा का मुख्य केंद्र ‘एकल विद्यालय’ का अनूठा मॉडल रहा। वक्ताओं ने बताया कि कैसे एक शिक्षक वाले ये विद्यालय आज ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक सामाजिक और शैक्षिक परिवर्तन का माध्यम बने हुए हैं। जमीनी स्तर पर चल रहा यह आंदोलन आज विश्व के सबसे बड़े शैक्षिक अभियानों में से एक है।
डॉ0 राव ने एकल विद्यालय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तमाम सरकारी प्रयासों के बाद आज भी सभी तक फार्मल एजुकेशन नहीं पहुॅच पायी है। इस कमी को पूरा करने के लिए एकल विद्यालय काम कर रहा है, जहाँ दूर दराज के ग्रामीण इलाकों में वे शिक्षा दे रहे है। 35 साल पहले शुरू हुई इस पहल में आज पारंपरिक शिक्षा के साथ ही गांव के बच्चों को डिजिटल दुनिया से भी रूबरू करवाया जाता है, जहाँ वे दैनिक जीवन में पड़ने वाली जरूरतों का सामना कर पाने में सक्षम हो सकें।
शिक्षा के साथ उद्यमिता पर जोर
एकल युवा परिषद के अध्यक्ष डॉ. राव विक्रम सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “एकल विद्यालय केवल एक कक्षा नहीं है, बल्कि यह गांव के संपूर्ण उत्थान का केंद्र है। हमारा लक्ष्य प्राथमिक शिक्षा को सशक्त बनाने के साथ-साथ जैविक खेती, स्वास्थ्यवर्धक भोजन और युवाओं में उद्यमिता की भावना को जागृत करना है। हम ऐसे समुदायों का निर्माण कर रहे हैं जो आत्मनिर्भर भी हों और संस्कारयुक्त भी।”
एकीकृत ग्रामीण विकास मॉडल
परिषद के उपाध्यक्ष श्री अभिषेक गुप्ता और महामंत्री श्री शुभांक गुप्ता ने ‘एकीकृत ग्रामीण विकास मॉडल’ पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, स्वरोजगार और सांस्कृतिक मूल्यों का समन्वय ही सतत ग्रामीण प्रगति की कुंजी है।
ऑर्गेनिक खेती से सशक्त हो रही महिलाएं
डा0 राव ने बताया कि एकल संस्था का प्रसाय सिर्फ गांव तक शिक्षा पहुॅचाना ही नहीं है, बल्कि वे गांवों में रोजगार व ज्यादा आमदनी के स्त्रोत भी बना रहे है जिससे गांव के लोग गांव में ही रहे और खेती के माध्यम से देश के विकास में अपना योगदान दे सके।
उन्होंने एकल उपज के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि एकल की महिला सदस्यों द्वारा आॅर्गेनिक खेती से जो उत्पाद बन कर तैयार होते है उन्हें बाजार में बेच कर उसका पूरा लाभ महिलाओं के बीच में बांट दिया जाता है। फिलहाल एकल उपज के अंतर्गत हल्दी बाजार में उपलब्ध है।
प्रबुद्ध वर्ग की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर डॉ. ए. एस. प्रसाद, श्री ध्रुव रुड्या, नवीन चौधरी और संकल्प अग्रवाल सहित शहर के कई प्रतिष्ठित नागरिक और सामाजिक चिंतक मौजूद रहे। सभी ने ग्रामीण सशक्तिकरण को ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण से जोड़ने में एकल के योगदान की मुक्तकंठ से सराहना की।
संकल्प के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन इस दृढ़ संकल्प के साथ हुआ कि ग्रामीण विकास में युवाओं और समुदाय की भागीदारी को और अधिक बढ़ाया जाएगा। प्रतिभागियों ने माना कि गांव ही भारत की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रीढ़ हैं, और इनका विकास ही राष्ट्र का वास्तविक विकास है।
