कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए यूजीसी (UGC) बिल 2026 को लेकर असंतोष की आग भड़क उठी है। मंगलवार को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के बैनर तले सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी (DM) कार्यालय का घेराव किया। हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस बिल को समाज को बांटने वाला ‘काला कानून’ करार दिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यूजीसी के नए नियम न केवल शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता को खतरे में डालेंगे, बल्कि छात्रों के बीच जातिगत आधार पर गहरी खाई पैदा करेंगे। जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इस बिल को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन देशव्यापी रूप लेगा।
भाजपा नेता ने खून से लिखा पत्र, पीएम मोदी से भावुक अपील
इस विरोध प्रदर्शन के बीच सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा मंडल उपाध्यक्ष आकाश ठाकुर ने इस बिल के विरोध में अपना खून बहाया। आकाश ठाकुर ने अपने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने बिल पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
आकाश ठाकुर ने पत्र में लिखा:
“यह बिल भविष्य में समाज और शिक्षण संस्थानों में भेदभाव को बढ़ावा देगा। यह युवाओं के बीच समरसता खत्म कर जहर घोलने का काम करेगा। शिक्षण संस्थानों में छात्रों को जातियों में बांटना देश की अखंडता के लिए घातक है।”
भाजपा नेता का यह कदम न केवल चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि यह संकेत भी दे रहा है कि बिल को लेकर पार्टी के भीतर भी असंतोष के सुर उठने लगे हैं।
समाज को बांटने की साजिश: सामाजिक संगठनों का आरोप
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देती है, लेकिन यूजीसी के ये नए नियम सवर्ण समाज और सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि:
- भेदभाव को बढ़ावा: नए नियमों से कॉलेजों में छात्रों के बीच घृणा पैदा होगी।
- संस्थानों का राजनीतिकरण: शिक्षण संस्थानों में निष्पक्षता खत्म हो जाएगी।
- सामाजिक कटुता: लोग एक-दूसरे को प्रतियोगी के बजाय जातिगत दुश्मन की तरह देखने लगेंगे।
