UP News: सावधान! सामूहिक विवाह में आए 12000 मेहमान, लेकिन खाना सिर्फ 2000 का बना; योगी सरकार ने लिया ऐसा एक्शन कि कांप उठे ठेकेदार! – NewsKranti

UP News: सावधान! सामूहिक विवाह में आए 12000 मेहमान, लेकिन खाना सिर्फ 2000 का बना; योगी सरकार ने लिया ऐसा एक्शन कि कांप उठे ठेकेदार!

कानपुर प्रशासन ने सामूहिक विवाह में अव्यवस्था फैलाने वाली फर्म 'नेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मर्स' पर बड़ी कार्रवाई की है। टेंडर शर्तों के उल्लंघन पर फर्म को 5 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • कुल लक्ष्य: 635 जोड़ों का कार्यादेश।
  • उपस्थिति: 561 जोड़े और हजारों परिजन।
  • लापरवाही: कुल आवश्यकता का मात्र 45% प्रबंध ही मौके पर मिला।
  • सजा: फर्म ब्लैकलिस्ट, भुगतान रोका गया, टेंडर निरस्त।
  • भविष्य की तैयारी: शेष 398 विवाहों के लिए नई ई-टेंडर प्रक्रिया शुरू।

कानपुर। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी शादी में 12 हजार से ज्यादा मेहमान बुलाए जाएं और खाना सिर्फ 2 हजार लोगों का बने? उत्तर प्रदेश के कानपुर में ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, जिसे गरीब बेटियों के सम्मान का प्रतीक माना जाता है, उसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाने की कोशिश की गई। लेकिन अब इस मामले में जिला प्रशासन ने ‘ब्रह्मास्त्र’ चला दिया है।

शादी का जश्न बना ‘सिरदर्द’ बीते 11 दिसंबर को कानपुर के CSA कैंपस में 561 जोड़ों का निकाह और फेरे होने थे। पंडाल सजा था, जोड़े तैयार थे और हजारों की तादाद में उनके परिजन आशीर्वाद देने पहुंचे थे। लेकिन जैसे ही भोजन का समय हुआ, वहां चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। लोग खाने के लिए भटकते रहे, लेकिन पतीले खाली थे।

जांच कमेटी की रिपोर्ट: जो दिखा वो शर्मनाक था मुख्य विकास अधिकारी (CDO) दीक्षा जैन ने जब मामले की गहराई से जांच करवाई, तो रिपोर्ट ने प्रशासन के होश उड़ा दिए। जांच में पाया गया कि:

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  1. भूखा रहा कुनबा: 12,342 लोगों की अपेक्षित भीड़ के सामने फर्म ने केवल 2100 लोगों का खाना बनाया। यह कुल जरूरत का 20% भी नहीं था।
  2. पूजा में भी चोरी: 561 जोड़ों के लिए कम से कम उतनी ही वेदियों की जरूरत थी, लेकिन फर्म ने मात्र 370 वेदियां बनाकर औपचारिकता पूरी कर ली।
  3. कैमरे गायब: टेंडर में 25 फोटोग्राफरों का पैसा लिया गया, लेकिन मौके पर सिर्फ 2 लोग फोटो खींच रहे थे।
  4. घटिया उपहार: जो दीवार घड़ियां नवविवाहितों को दी गईं, वे कबाड़ की क्वालिटी की थीं।

फर्म पर गिरी गाज: 5 साल तक कोई सरकारी काम नहीं इस महाघोटाले के केंद्र में रही फर्म ‘नेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मर्स प्रोक्योरमेंट, प्रोसेसिंग एंड रिटेलिंग कोऑपरेटिव्स ऑफ इंडिया लिमिटेड’ को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के आदेश पर ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।

  • फर्म पर अगले 5 साल के लिए बैन लगा दिया गया है।
  • उनकी सिक्योरिटी मनी और ईपीबीजी (EPBG) जब्त कर ली गई है।
  • उपहारों में हुई धांधली के लिए 1.40 लाख रुपये की अतिरिक्त रिकवरी का आदेश दिया गया है।

ठेकेदारों को सख्त चेतावनी प्रशासन की इस बड़ी कार्रवाई ने उन ठेकेदारों की नींद उड़ा दी है जो सरकारी योजनाओं को ‘कमाने का जरिया’ समझते हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि गरीबों के हक पर डाका डालने वाली किसी भी फर्म को बख्शा नहीं जाएगा। बाकी बचे हुए विवाहों के लिए अब नया ई-टेंडर जारी किया जाएगा, ताकि दोबारा ऐसी शर्मनाक स्थिति न पैदा हो।


दीवाल घड़ी मानक के अनुरूप नहीं 1.40 लाख रुपये की होगी कटौती

जांच में उपहार सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हैं। एम/एस नेशनल को-ऑपरेटिव कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा आपूर्ति की गई दीवार घड़ियां निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं। दीवाल घड़ी वितरण में 1 लाख 40 हजार रुपये की गड़बड़ी सामने आने पर रकम संबंधित फर्म के भुगतान से सीधे काटी जाएगी।

जांच में सामने आईं प्रमुख कमियां

  • सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 12,342 लोगों की अपेक्षित मौजूदगी के मुकाबले केवल 2100–2300 लोगों के लिए भोजन
  • भोजन तय मेनू के अनुसार नहीं
  • 561 जोड़ों के लिए केवल 370 वेदियां और पूजन सामग्री
  • तय 25 फोटोग्राफरों की जगह सिर्फ 2 फोटोग्राफर
  • लड्डू और ड्राई फ्रूट्स की मात्रा कम
  • जयमालाओं की संख्या मानक के अनुरूप नहीं
  • पंडाल छोटा, बैठने के लिए केवल लगभग 3000 कुर्सियां
  • एलईडी स्क्रीन और सजावट की व्यवस्था अधूरी
  • जांच समिति के अनुसार फर्म द्वारा की गई व्यवस्थाएं कुल आवश्यकता की तुलना में केवल लगभग 45 प्रतिशत ही पायी गई

प्रशासन की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 5 साल का बैन और भारी जुर्माना

जिला प्रशासन ने फर्म की इस धोखाधड़ी पर कड़ा प्रहार करते हुए निम्नलिखित कार्रवाई की है:

  1. ब्लैकलिस्ट: ‘नेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मर्स प्रोक्योरमेंट, प्रोसेसिंग एंड रिटेलिंग कोऑपरेटिव्स ऑफ इंडिया लिमिटेड’ को 5 साल के लिए सरकारी कामों से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
  2. भुगतान पर रोक: फर्म के सभी बिलों पर ब्रेक लगा दिया गया है। अब काम के मूल्यांकन (केवल 45% व्यवस्था) के आधार पर भारी कटौती के बाद ही भुगतान होगा।
  3. सिक्योरिटी जब्त: निविदा शर्तों के उल्लंघन पर फर्म की सिक्योरिटी मनी जब्त कर ली गई है।
  4. उपहारों में भी धांधली: विवाह में दी गई दीवार घड़ियां घटिया क्वालिटी की निकलीं, जिसके चलते 1.40 लाख रुपये की अतिरिक्त कटौती की जाएगी।

कड़ा संदेश: जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि गरीबों के लिए चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार या लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।

पुराना टेंडर निरस्त, अब होगी नई प्रक्रिया

इस कांड के बाद प्रशासन ने शेष 398 सामूहिक विवाहों के लिए पुराने ई-टेंडर को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक स्थिति दोबारा न बने।

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