UP: बिजनौर में तेंदुओं की संख्या बढ़ी, वन विभाग ने 75% नसबंदी योजना बनाई – NewsKranti

UP: बिजनौर में तेंदुओं की संख्या बढ़ी, वन विभाग ने 75% नसबंदी योजना बनाई

बिजनौर में तेंदुओं की बढ़ती संख्या और हमलों को देखते हुए यूपी वन विभाग ने 75% तेंदुओं की नसबंदी योजना तैयार की है। विभाग के अनुसार इससे अगले पांच साल में मानव और पशुधन हानि में 80% तक कमी आ सकती है।

Saniya Soni
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Highlights
  • बिजनौर में 444 तेंदुए हैं, जिनमें 222 मादा और 111 वयस्क शामिल।
  • वर्ष 2025 तक तेंदुओं ने 30 लोगों पर हमला किया, 9 मौतें हुईं।
  • 446 में से 326 गांव प्रभावित, 40 अत्यंत संवेदनशील और 80 संवेदनशील।
  • मादा तेंदुए का प्रजनन चक्र 2 साल का, एक बार में लगभग 3 शावक।
  • वन विभाग ने 75% तेंदुओं की नसबंदी (प्रति वर्ष 15%) करने की सिफारिश की।
  • इससे पांच साल में तेंदुओं की संख्या स्थिर होकर 775 तक रह सकती है।
  • नसबंदी से मानव मृत्यु और पशुधन हानि में 80% तक कमी संभव।
  • समस्या का कारण: बिजनौर का राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पास होना, गन्ने के खेतों में तेंदुए का प्रवेश।
  • स्टाफ की कमी प्रबंधन में चुनौती: 326 में से केवल 163 कर्मी तैनात।

UP: बिजनौर में तेंदुओं की संख्या बढ़ी, वन विभाग ने 75% नसबंदी योजना बनाई

बिजनौर। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले सहित कई जिलों में तेंदुओं के हमले बढ़ने के कारण वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। अकेले बिजनौर में वर्तमान में 444 तेंदुए हैं, जिनमें 222 मादा और 111 वयस्क शामिल हैं। वर्ष 2025 में सितंबर तक तेंदुओं ने 30 लोगों पर हमला किया, जिनमें 9 की मौत हुई।

वन विभाग ने इस समस्या से निपटने के लिए 75% तेंदुओं की नसबंदी (प्रति वर्ष 15%) की वैज्ञानिक योजना तैयार की है। इस योजना के लागू होने से अगले पांच साल में तेंदुओं की संख्या 775 तक स्थिर हो जाएगी और मानव मृत्यु व पशुधन हानि में 80% तक कमी आ सकती है।

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बिजनौर में कुल 446 गांव हैं, जिनमें से 326 गांव तेंदुओं से प्रभावित हैं। इनमें 40 अत्यंत संवेदनशील और 80 संवेदनशील गांव शामिल हैं। मादा तेंदुए का प्रजनन चक्र 2 साल का है और एक बार में लगभग 3 शावक देती हैं। नर तेंदुए के पीछे 1.5 मादा का अनुपात है।

समस्या का मुख्य कारण बिजनौर का राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पास होना है। बाघों की संख्या बढ़ने के कारण तेंदुए गैर-वन क्षेत्रों जैसे गन्ने के खेतों की ओर आ गए हैं। खेतों में पालतू पशुओं की उपलब्धता ने तेंदुओं के लिए भोजन की समस्या कम कर दी है, जिससे जनसंख्या में तेज वृद्धि हुई है।

वन विभाग ने शासन और वन मंत्री के समक्ष रिपोर्ट में कहा है कि अनुसूचित 75% नसबंदी के जरिए तेंदुओं की आबादी को नियंत्रित किया जा सकता है और मानव-पशुधन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। हालांकि स्टाफ की कमी (326 में से केवल 163 कर्मी तैनात) प्रबंधन की चुनौती बनी हुई है।

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