भारतीय रुपये की लगातार गिरावट ने बाजार और एक्सपर्ट्स के बीच चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच SBI Research ने अपनी ताजा रिपोर्ट ‘In Rupee We Trust’ में रुपये के भविष्य को लेकर अहम अनुमान पेश किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपया फिलहाल डिवैल्यूएशन के तीसरे चरण में है, जहां घरेलू और वैश्विक दोनों कारणों से दबाव बना हुआ है।
क्यों गिर रहा है रुपया?
SBI रिसर्च के अनुसार रुपये पर दबाव की मुख्य वजहें घरेलू आर्थिक तनाव, वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक व्यवधान हैं। इसके अलावा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में आई बड़ी गिरावट ने भी रुपये की मजबूती को कमजोर किया है।
2007–2014 के दौरान जहां औसतन 162.8 अरब डॉलर सालाना निवेश आता था, वहीं 2015–2025 के बीच यह घटकर 87.7 अरब डॉलर रह गया।
महीने तक दबाव, फिर मजबूत वापसी
रिपोर्ट में मार्कोव रिजीम-स्विचिंग मॉडल के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि रुपया अगले करीब 6 महीने तक दबाव में रह सकता है। हालांकि, इसके बाद इसमें तेज रिकवरी देखने को मिल सकती है। SBI रिसर्च का अनुमान है कि 2026 में रुपया करीब 6.5% मजबूत होकर 87 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है।
RBI के एक्शन से दिखी ताकत
हाल ही में रुपया 91 रुपये प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन RBI के मजबूत हस्तक्षेप के बाद इसमें जबरदस्त सुधार देखने को मिला। सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर की बिक्री के चलते रुपया एक दिन में 1.03% मजबूत हुआ, जो बीते सात महीनों की सबसे बड़ी तेजी रही।
डॉलर की बढ़ती मांग भी बड़ी वजह
SBI रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई 2025 से आयातकों और निर्यातकों द्वारा हेजिंग बढ़ाने के कारण फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर की मांग तेज हो गई। कुल अतिरिक्त मांग 145 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जिसके चलते RBI को बाजार में दखल देना पड़ा।
क्या 2026 में 87 पर पहुंचेगा रुपया?
SBI रिसर्च रुपये को लेकर अब भी सकारात्मक रुख रखता है। रिपोर्ट के अनुसार अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और पूंजी प्रवाह में स्थिरता आती है, तो 2026 में रुपया एक बार फिर मजबूत होकर 87 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को छू सकता है।
