वाराणसी: उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े ड्रग सिंडिकेट ‘कफ सिरप कांड’ में पुलिस और SIT की कार्रवाई तेज हो गई है। वाराणसी की प्रसिद्ध सप्तसागर दवा मंडी से संचालित इस अवैध कारोबार में पुलिस ने मुख्य मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के चचेरे भाई को गिरफ्तार किया है। आरोपी की गिरफ्तारी के पीछे बैंक की एक डिपॉजिट स्लिप (जमा पर्ची) सबसे बड़ा सबूत बनी है।
बैंक ट्रांजैक्शन से खुला राज
जांच अधिकारियों के अनुसार, फरार चल रहे शुभम जायसवाल के वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के दौरान एक बैंक डिपॉजिट स्लिप मिली। इस स्लिप के जरिए करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया गया था। कड़ाई से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने शुभम के चचेरे भाई को दबोच लिया, जो इस पूरे सिंडिकेट में मनी ट्रेल और फर्जी फर्मों के प्रबंधन में मदद कर रहा था।
सप्तसागर मंडी में फर्जी फर्मों का जाल
जांच में खुलासा हुआ है कि वाराणसी की सप्तसागर ड्रग मार्केट में कई ऐसी फर्में कागजों पर चल रही थीं, जिनका हकीकत में कोई वजूद नहीं था। इन फर्जी फर्मों के नाम पर भारी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप मंगाया जाता था और फिर उसे ऊंचे दामों पर तस्करी के जरिए अन्य राज्यों और सीमा पार भेजा जाता था।
‘नीले से पीला’ कोड वर्ड और हवाला नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, यह सिंडिकेट ‘नीले से पीला’ (यानी सिरप बेचकर सोना खरीदना) कोड वर्ड का इस्तेमाल करता था। ड्रग्स के अवैध कारोबार से मिले पैसे को ठिकाने लगाने के लिए हवाला नेटवर्क और बैंक खातों का एक जटिल जाल बुना गया था, जिसे अब पुलिस धीरे-धीरे सुलझा रही है।
अब तक की बड़ी कार्रवाई
इस मामले में अब तक शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। ईडी (ED) और पुलिस की संयुक्त टीमें अब शुभम की करोड़ों की अवैध संपत्ति को कुर्क करने की तैयारी में हैं।
