साहित्य के महाकुंभ में गूंजी नई आवाजें: विश्व पुस्तक मेला 2026 में सात कृतियों का भव्य विमोचन – NewsKranti

साहित्य के महाकुंभ में गूंजी नई आवाजें: विश्व पुस्तक मेला 2026 में सात कृतियों का भव्य विमोचन

53वें विश्व पुस्तक मेले में इंक पब्लिकेशन ने 'साहित्य सृजन के पथ पर हमारी यात्रा' कार्यक्रम के तहत विविध विषयों पर आधारित पुस्तकों का विमोचन किया, जहाँ लेखकों ने अपनी साहित्यिक यात्रा और सामाजिक सरोकारों पर संवाद किया।

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मुख्य बिंदु :

  • लेखक मंच पर आयोजन: इंक पब्लिकेशन द्वारा ‘साहित्य सृजन के पथ पर हमारी यात्रा’ विषय के तहत भव्य कार्यक्रम।
  • सोनू चौहान का संघर्ष: ‘शायर का घर’ और ‘वतन की मिट्टी’ के माध्यम से एक गृहणी की साहित्यिक सफलता की चर्चा।
  • विविध विधाएँ: काव्य संग्रह, कहानी संग्रह और सामाजिक विमर्श पर आधारित पुस्तकों का लोकार्पण।
  • दिग्गज उपस्थिति: सरस आजाद, डॉ. मोनिका शर्मा और अलंकृता राय जैसे चर्चित रचनाकारों का जमावड़ा।
  • विश्व पुस्तक मेला: 35 देशों की भागीदारी के साथ प्रगति मैदान में साहित्य का उत्सव।

नई दिल्ली: राजधानी के प्रगति मैदान में आयोजित 53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के ‘लेखक मंच’ पर साहित्य की नई छटा देखने को मिली। इंक पब्लिकेशन द्वारा आयोजित ‘साहित्य सृजन के पथ पर हमारी यात्रा: पुस्तक विमोचन एवं संवाद’ कार्यक्रम में देश के विभिन्न कोनों से आए रचनाकारों ने अपनी कृतियों के माध्यम से पाठकों से सीधा संवाद किया।

सोनू चौहान: संघर्ष से सृजन तक का सफर

कार्यक्रम के केंद्र में रहीं युवा लेखिका सोनू चौहान, जिनके दो कहानी संग्रह— ‘शायर का घर’ और ‘वतन की मिट्टी’ का विमोचन किया गया। उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश कुशवाहा ने कहा, “एक साधारण गृहणी और सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद सोनू चौहान का इस मंच तक पहुँचना यह सिद्ध करता है कि प्रतिभा किसी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। उनकी यात्रा समाज के लिए एक प्रेरणा है।” वहीं डॉ. मोनिका शर्मा ने उनकी लेखनी को ‘अद्भुत और जीवंत’ करार दिया।

युवा जोश और वैचारिक क्रांति

साहित्य जगत में तेजी से उभरते विकास बिश्नोई की पुस्तक ‘अनकहे लम्हे’ को दर्शकों की खूब सराहना मिली। अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोने वाले विकास ने कहा कि यह पुस्तक उन अहसासों की अभिव्यक्ति है, जिन्हें हम अक्सर व्यक्त नहीं कर पाते।

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मंच पर चर्चित लेखक सरस आजाद ने अपनी नई कृति ‘मनु-फिरदौस’ के माध्यम से सत्ता और समाज को आईना दिखाया। उन्होंने अपनी बेबाक शैली में कहा— “नफ़रतों के बाज़ार में कारोबार-ए-मुहब्बत करता हूँ, जी हुजूरी के दौर में मैं हाकिम से बगावत करता हूँ।”

प्रेम, विरह और स्त्री शक्ति का संगम

कवयित्री अलंकृता राय के काव्य संग्रह ‘गीली मिट्टी’ ने प्रेम और विरह के गहन रंगों को साझा किया। उन्होंने प्रेम को जीवन का आधार बताते हुए पाठकों का दिल जीत लिया। इसी क्रम में, डॉ. हरिवंश राय बच्चन पुरस्कार से सम्मानित डॉ. मोनिका शर्मा ने अपने प्रेम काव्य ‘याद तुम्हारी’ का लोकार्पण किया। पेशे से पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोनिका ने जब अपनी कविताओं का पाठ किया, तो पूरा लेखक मंच तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।

स्त्री विमर्श पर आधारित सुरभि जैन की पुस्तक ‘रूपांतरा’ ने समाज में महिलाओं के संघर्ष को रेखांकित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नारी-शक्ति का असली रूपांतरण शोर में नहीं, बल्कि धरातल पर आने वाले बदलाव में दिखता है। वहीं, जयंती सेन मीना की कृति ‘सरकती परछाइयाँ’ ने बंगाली और हिंदी संस्कृति के सुंदर मेल को प्रदर्शित किया।

मेले का भव्य स्वरूप

इंक पब्लिकेशन के मुख्य कर्ताधर्ता दिनेश कुशवाहा ने कार्यक्रम की शुरुआत और समापन किया, जबकि मंच का कुशल संचालन सविता सिंह सैवी ने किया। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष मेले में रूस, स्पेन, जापान और अबू धाबी समेत 35 से अधिक देश भाग ले रहे हैं। 3000 से अधिक स्टालों और 600 साहित्यिक कार्यक्रमों के साथ यह मेला 18 जनवरी तक पाठकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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