नई दिल्ली (ब्यूरो): भारत की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। दिल्ली स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत ने देश के खिलाफ जासूसी करने और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए काम करने के दोषी को साढ़े पांच साल (5.5 साल) के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस फैसले के साथ यह स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला देश की सैन्य सूचनाओं की चोरी और उसे दुश्मन देश तक पहुंचाने से जुड़ा है। जांच के दौरान यह पाया गया कि दोषी शख्स लंबे समय से पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों के संपर्क में था। वह ‘हनीट्रैप’ या पैसों के लालच में आकर भारतीय सेना के मूवमेंट, रणनीतिक ठिकानों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तस्वीरें व अन्य जानकारी डिजिटल माध्यमों से सीमा पार भेज रहा था।
NIA की सख्त पैरवी और सबूत
एनआईए ने इस मामले की गहन जांच की और आरोपी के पास से कई संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन और दस्तावेज बरामद किए थे। फॉरेंसिक जांच में यह साबित हुआ कि आरोपी के फोन से पाकिस्तानी हैंडलर्स को संवेदनशील डेटा भेजा गया था। कोर्ट में पेश किए गए गवाहों और डिजिटल सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने माना कि आरोपी के कृत्य ने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला था।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
सजा सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश ने कहा कि जासूसी न केवल एक अपराध है, बल्कि यह उन हजारों सैनिकों के जीवन को खतरे में डालने जैसा है जो सीमा पर देश की रक्षा करते हैं। ऐसे मामलों में नरमी बरतने से समाज और देश की सुरक्षा पर विपरीत असर पड़ता है। आरोपी पर जेल की सजा के साथ-साथ भारी जुर्माना भी लगाया गया है।
पाकिस्तानी खुफिया तंत्र का जाल
यह मामला एक बार फिर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों द्वारा भारतीय नागरिकों को बरगलाने और उन्हें जासूसी के जाल में फंसाने की कोशिशों को उजागर करता है। जांच एजेंसी ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति से सैन्य जानकारी साझा करना आत्मघाती हो सकता है।
