बीजापुर, 05 फरवरी 2026: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों को एक और बड़ी ऐतिहासिक सफलता मिली है। बीजापुर जिले में संचालित ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान से प्रभावित होकर 54 लाख रुपये के सामूहिक इनामी 12 सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस और CRPF के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में 8 महिला नक्सली और 4 पुरुष शामिल हैं, जो कई बड़ी हिंसक वारदातों में वांछित थे।
DVCM स्तर के बड़े लीडर ने छोड़ी बंदूक
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सरेंडर करने वाले नक्सलियों में सबसे महत्वपूर्ण नाम सोमडू मड़कम का है। सोमडू दरभा डिवीजन का DVCM (डिवीजनल कमेटी मेंबर) और कटेकल्याण एरिया कमेटी का इंचार्ज था। उस पर शासन ने 8 लाख रुपये का इनाम रखा था। सोमडू के साथ ही हुंगी कुंजाम और पायकी कुंजाम (प्रत्येक 8 लाख इनामी) ने भी हिंसा का रास्ता त्याग कर समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का संकल्प लिया।
विस्फोटकों का बड़ा जखीरा बरामद
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने केवल बंदूकें ही नहीं, बल्कि भारी मात्रा में तबाही का सामान भी पुलिस को सौंपा। इसमें 250 नग जिलेटिन स्टिक्स, 400 डेटोनेटर, गन पाउडर से भरा एक प्लास्टिक ड्रम और कोर्डेक्स वायर का बंडल शामिल है। सुरक्षाबलों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक मिलने से भविष्य में होने वाली कई बड़ी आईईडी (IED) घटनाओं को समय रहते टाल दिया गया है।
क्यों टूट रहा है नक्सलियों का भ्रम?
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि अंदरूनी इलाकों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सड़क कनेक्टिविटी और सरकार की नई पुनर्वास नीति ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) के कारण नक्सली संगठन अब अलग-थलग पड़ रहे हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने स्वीकार किया कि वे माओवादी संगठन की खोखली विचारधारा, भेदभाव और बड़े कैडरों द्वारा आदिवासियों के शोषण से तंग आ चुके थे।
नई पुनर्वास नीति का मिल रहा लाभ
बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को छत्तीसगढ़ शासन की नई पुनर्वास नीति के तहत सभी सुविधाएं दी जाएंगी। उन्होंने अन्य नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा छोड़कर ‘पूना मारगेम’ अभियान का हिस्सा बनें। इस साल अब तक 220 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं, जो बस्तर में शांति की नई सुबह का संकेत है।
