कानपुर। कहते हैं कि “जाको राखे साइयां, मार सके न कोय”, यह कहावत शुक्रवार को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर उस वक्त सच साबित हुई जब एक महिला यात्री चलती ट्रेन के नीचे आने ही वाली थी। प्लेटफार्म नंबर 5 पर खड़ी भीड़ की सांसें तब थम गईं, जब मगध एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 20802) की रफ़्तार के साथ एक महिला का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे मौत के जाल (ट्रेन और प्लेटफार्म के बीच का गैप) की ओर खींचती चली गई।
कैसे हुआ रूह कंपा देने वाला हादसा?
मेस्टन रोड, मिश्री बाजार की रहने वाली अनवर जहाँ अपने बेटे आमिर के साथ पटना जाने के लिए स्टेशन पहुंची थीं। ट्रेन प्लेटफार्म छोड़ चुकी थी और उसकी गति धीरे-धीरे बढ़ रही थी। सफर छूट न जाए, इस घबराहट में अनवर जहाँ ने चलती ट्रेन के कोच में चढ़ने का जोखिम भरा प्रयास किया। जैसे ही उन्होंने पायदान पर पैर रखा, उनका हाथ हैंडल से फिसल गया और वह सीधे नीचे गिरने लगीं।
आरपीएफ जवान विनोद यादव: स्टेशन के ‘रियल लाइफ हीरो’
जब प्लेटफार्म पर मौजूद अन्य लोग चीख रहे थे, वहीं ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ कांस्टेबल विनोद कुमार यादव ने बिजली की गति से प्रतिक्रिया दी। बिना अपनी सुरक्षा की परवाह किए, विनोद ने दौड़ लगाकर महिला को उस वक्त दबोच लिया जब उनका आधा शरीर प्लेटफार्म के नीचे जा चुका था। अगर एक सेकंड की भी देरी होती, तो महिला ट्रेन के पहियों के नीचे आ सकती थी।
“मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया था, मुझे लगा अब मैं नहीं बचूंगी। लेकिन जवान ने मेरा हाथ ऐसे पकड़ा जैसे खुदा ने उन्हें मेरे लिए ही भेजा हो।” — अनवर जहाँ (पीड़ित महिला)
स्टेशन पर मची अफरा-तफरी, फिर गूंजी तालियां
महिला को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद आरपीएफ स्टाफ उन्हें तुरंत थाने ले गया। वहां उन्हें पानी पिलाया गया और प्राथमिक उपचार दिया गया। पूछताछ में पता चला कि जल्दबाजी ही इस हादसे की मुख्य वजह थी। महिला और उनके बेटे ने कांस्टेबल विनोद यादव के प्रति हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। आरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विनोद यादव की इस बहादुरी की सराहना की है।
रेलवे प्रशासन की सख्त अपील
इस घटना के बाद रेलवे और आरपीएफ प्रशासन ने एक बार फिर यात्रियों को चेतावनी दी है:
- कभी भी चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने का प्रयास न करें।
- स्टेशन पर हमेशा समय से पहले पहुंचें।
- आपकी एक सेकंड की जल्दबाजी पूरे परिवार को उम्र भर का गम दे सकती है।
