नई दिल्ली/कोलकाता:
पश्चिम बंगाल की सत्ता के गलियारों में इस वक्त भारी बेचैनी देखी जा रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो अपनी फायरब्रांड राजनीति के लिए जानी जाती हैं, इस समय कानूनी और राजनीतिक मोर्चों पर एक साथ घिरती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामलों और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बढ़ती सक्रियता ने राज्य की राजनीति में ‘जेल’ और ‘इस्तीफे’ जैसे शब्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई के दौरान राज्य प्रशासन के कामकाज और जांच में देरी पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट की सख्ती ने यह संकेत दिया है कि अब केंद्रीय एजेंसियों को और अधिक अधिकार मिल सकते हैं, जिससे ममता सरकार के करीबी मंत्रियों और अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ना तय है।
ED की घेराबंदी और सियासी ड्रामा
ED ने राशन घोटाले, शिक्षक भर्ती घोटाले और कोयला तस्करी मामले में अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। विपक्षी दलों का दावा है कि जांच की आंच अब सीधे मुख्यमंत्री की चौखट तक पहुँच रही है। बीजेपी ने ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
टीएमसी का पलटवार
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) इसे केंद्र की ‘बदले की राजनीति’ बता रही है। ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह केंद्रीय एजेंसियों के डर से झुकने वाली नहीं हैं। उन्होंने इसे बंगाल की अस्मिता पर हमला करार दिया है।
