प्रेमानंद महाराज ने मूक-बधिर बच्चों को दिया जीवन का सबसे बड़ा मंत्र; भजन पर बच्चों का डांस देख भावुक हुए संत - NewsKranti

प्रेमानंद महाराज ने मूक-बधिर बच्चों को दिया जीवन का सबसे बड़ा मंत्र; भजन पर बच्चों का डांस देख भावुक हुए संत

जब मूक-बधिर बच्चों ने प्रेमानंद महाराज से पूछा—"महाराज जी, दुनिया हमें कमजोर समझती है, हम हिम्मत कैसे न हारें?" संत का उत्तर और बच्चों का समर्पण देख हर आँख नम हो गई। देखें वायरल वीडियो की पूरी कहानी।

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ख़बर एक नज़र में :
  • भावुक क्षण: मूक-बधिर बच्चों का बिना संगीत सुने केवल भाव पर थिरकना।
  • महाराज जी की सीख: शारीरिक अक्षमता कोई बाधा नहीं है, असली शक्ति 'आत्मबल' है।
  • नाम जप का महत्व: हृदय से 'राधा-राधा' जपने की प्रेरणा।
  • दिव्य दृष्टि: बच्चों में साक्षात ईश्वर का रूप देखना।

वृंदावन धर्म नगरी वृंदावन में रोज़ाना हजारों भक्त संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के दर्शन करने पहुँचते हैं। लेकिन हाल ही में श्री राधा केली कुंज में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहाँ मौजूद हर व्यक्ति की आँखों को नम कर दिया। कुछ मूक-बधिर (बोलने और सुनने में अक्षम) बच्चे महाराज जी का आशीर्वाद लेने पहुँचे थे। इन बच्चों ने न केवल महाराज जी से जीवन की चुनौतियों पर प्रश्न किए, बल्कि भजनों की धुन (जिसे वे सुन नहीं सकते थे, पर महसूस कर रहे थे) पर ऐसा नृत्य किया कि स्वयं महाराज जी एकटक उन्हें निहारते रह गए।

“हिम्मत न टूटे, इसके लिए क्या करें महाराज जी?”

बच्चों ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से महाराज जी से एक बहुत ही गहरा सवाल पूछा। उन्होंने पूछा, “महाराज जी, हम बोल नहीं सकते, सुन नहीं सकते। कभी-कभी दुनिया के व्यवहार से हमारी हिम्मत टूटने लगती है। हमें क्या करना चाहिए कि हम कभी हार न मानें?”

इस प्रश्न पर महाराज जी के चेहरे पर एक असीम करुणा उभर आई। उन्होंने बच्चों को समझाते हुए कहा:

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“तुम्हारी शक्ति तुम्हारी वाणी या कानों में नहीं, तुम्हारे भीतर बैठे परमात्मा में है। तुम यह मत सोचो कि तुम कुछ कम हो। तुम राधा नाम का आश्रय लो। जो नाम तुम जुबान से नहीं बोल सकते, उसे हृदय की धड़कनों से जपो। जब भगवान का साथ होगा, तो पूरी दुनिया की ताकत भी तुम्हारी हिम्मत नहीं तोड़ पाएगी।”

भजन पर थिरके बच्चे, संत ने जोड़े हाथ

सत्संग के दौरान जब राधा नाम का संकीर्तन शुरू हुआ, तो उन बच्चों ने वह कर दिखाया जिसकी कल्पना करना कठिन है। संगीत की धुन और ताल को महसूस करते हुए बच्चे झूमने लगे। वे सुन नहीं पा रहे थे, लेकिन उनके चेहरे की खुशी और भक्ति का भाव यह बता रहा था कि वे दिव्य आनंद से जुड़े हुए हैं। बच्चों को इस तरह मग्न होकर नाचते देख प्रेमानंद महाराज ने अपने हाथ जोड़ लिए और काफी देर तक उन्हें एकटक देखते रहे। उन्होंने कहा कि ये बच्चे साधारण नहीं हैं, बल्कि ये प्रभु की विशेष कृपा के पात्र हैं।

निष्कर्ष: भक्ति के लिए शब्दों की जरूरत नहीं

प्रेमानंद महाराज और इन विशेष बच्चों के बीच हुए इस मिलन ने यह सिद्ध कर दिया कि भक्ति और विश्वास के लिए न तो शब्दों की आवश्यकता है और न ही सुनने की शक्ति की। यह केवल हृदय का जुड़ाव है। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को ‘दिन की सबसे सकारात्मक खबर’ बता रहे हैं।

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