पटना | 5 फरवरी, 2026
बिहार की नीतीश सरकार ने प्रदेश में बढ़ते ‘सांस्कृतिक प्रदूषण’ और अश्लीलता के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा कदम उठाया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री समरात चौधरी ने साफ कर दिया है कि राज्य में अब सार्वजनिक स्थलों, बसों, ऑटो-रिक्शा, ट्रकों और कार्यक्रमों में अश्लील या दोहरे अर्थ वाले गाने बजाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसा करने वालों पर न केवल भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि उन्हें FIR दर्ज होने के बाद जेल की हवा भी खानी पड़ेगी।
होली से पहले पुलिस को ‘फ्री हैंड’, विशेष अभियान की शुरुआत
होली के त्योहार के करीब आते ही बिहार में अक्सर फूहड़ और अश्लील गानों की बाढ़ आ जाती है, जिससे सामाजिक सौहार्द और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचती है। इसे देखते हुए सम्राट चौधरी ने राज्य के सभी जिला पुलिस कप्तानों (SP) और रेंज IG/DIG को विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिस अब केवल चेतावनी नहीं देगी, बल्कि सीधे कानूनी कार्रवाई करेगी।
गृह मंत्री ने कहा, “सार्वजनिक तौर पर बजने वाले अश्लील गानों का बच्चों के कोमल मस्तिष्क पर अत्यंत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह अब केवल नैतिकता का विषय नहीं है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्या है।”
इन धाराओं में दर्ज होगा केस, जब्त होगा साउंड सिस्टम
बिहार सरकार के नए आदेश के मुताबिक, यदि कोई वाहन चालक या आयोजनकर्ता अश्लील गाने बजाते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 296 (अश्लील कृत्य और गाने) और धारा 79 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा:
- बसों और ऑटो के परमिट रद्द किए जा सकते हैं।
- मौके पर ही साउंड सिस्टम और म्यूजिक प्लेयर जब्त कर लिए जाएंगे।
- आयोजकों के खिलाफ भी मामला दर्ज होगा।
भोजपुरी, मगही और मैथिली गानों पर विशेष नजर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भाषा चाहे कोई भी हो—भोजपुरी, मगही, मैथिली या हिंदी—यदि गाने के बोल द्विअर्थी, भड़काऊ या महिलाओं के प्रति अपमानजनक हैं, तो वह इस प्रतिबंध के दायरे में आएगा। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि अगर वे कहीं भी ऐसी फूहड़ता देखें, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।
महिलाओं ने किया फैसले का स्वागत
इस फैसले का पूरे बिहार में व्यापक समर्थन मिल रहा है। पटना की सड़कों पर यात्रा करने वाली महिलाओं और छात्राओं का कहना है कि ऑटो और बसों में बजने वाले इन गानों की वजह से उन्हें अक्सर असहज महसूस करना पड़ता था। सरकार के इस कदम से सार्वजनिक परिवहन में सफर करना अब पहले से अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक होगा।
