मस्कट/वाशिंगटन: दुनिया एक बार फिर परमाणु युद्ध की दहलीज पर खड़ी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई के बीच चल रही जुबानी जंग अब ओमान के मस्कट में एक मेज पर पहुँचने वाली है। शुक्रवार को होने वाली इस ऐतिहासिक और बेहद तनावपूर्ण मुलाकात से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने खमेनेई को ऐसी चेतावनी दी है जिसने वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचा दिया है।
“खमेनेई की नींद उड़ जानी चाहिए” – ट्रंप का सीधा प्रहार
एनबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की धमकियों से डरना चाहिए, तो ट्रंप ने दो टूक कहा, “मैं कहूंगा कि उन्हें बहुत चिंतित होना चाहिए। हां, उन्हें डरना ही चाहिए।” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ओमान में दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत फिर से शुरू होने वाली है।
ट्रंप ने आगे खुलासा किया कि ईरान एक नए गुप्त परमाणु ठिकाने की योजना बना रहा था, जिसे अमेरिका ने पकड़ लिया है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, “हमने उनके नए ठिकाने का पता लगा लिया है। मैंने उनसे कह दिया है कि अगर तुमने वो शुरू किया, तो हम तुम्हारे साथ बहुत बुरा करेंगे।”
ओमान में ‘करो या मरो’ की स्थिति: क्यों बदला गया वेन्यू?
पहले यह बातचीत तुर्की (इस्तांबुल) में होनी थी, लेकिन ईरान ने आखिरी वक्त पर इसे ओमान स्थानांतरित करने की मांग की। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस बातचीत को केवल ‘परमाणु मुद्दों’ तक सीमित रखना चाहता है और अन्य क्षेत्रीय देशों (जैसे सऊदी अरब, यूएई) के हस्तक्षेप से बचना चाहता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने पुष्टि की है कि मस्कट में शुक्रवार सुबह 10 बजे यह बातचीत शुरू होगी।
ट्रंप की 3 कठोर शर्तें: जो ईरान को नहीं हैं मंजूर
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के सामने तीन ऐसी शर्तें रखी हैं, जिन्हें ईरान अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है:
- जीरो यूरेनियम एनरिचमेंट: ईरान किसी भी स्तर पर यूरेनियम का संवर्धन नहीं करेगा।
- मिसाइल कार्यक्रम पर रोक: ईरान को अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को खत्म या सीमित करना होगा।
- प्रॉक्सि वॉर का अंत: मध्य पूर्व में हमास, हिजबुल्लाह और हूतियों को समर्थन देना बंद करना होगा।
ईरानी सांसदों और अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि मिसाइल कार्यक्रम उनकी ‘रेड लाइन’ है और वे इस पर कोई समझौता नहीं करेंगे।
ईरान के अंदरूनी हालात और अमेरिकी दबाव
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब ईरान पिछले महीने हुए भीषण जन-आंदोलनों और सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जूझ रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर ईरान परमाणु रियायतें नहीं देता है, तो अमेरिका उसके परमाणु ठिकानों पर सीधे हमले कर सकता है, जैसा कि पिछले साल जून में ’12 दिवसीय युद्ध’ के दौरान हुआ था।
