IIT कानपुर का बड़ा नवाचार: अब घरों की छत पर छोटे विंड टरबाइन से बनेगी बिजली, 60 यूनिट तक मासिक उत्पादन

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Highlights
  • IIT कानपुर ने हल्की हवा में भी चलने वाला नया विंड टरबाइन मॉडल विकसित किया
  • ऊर्ध्व धुरी (Vertical Axis) पर आधारित डिजाइन, 3.5 m/s की हवा में भी बिजली उत्पादन
  • घरों व इमारतों की छतों पर लगाने योग्य छोटा और कम लागत वाला टरबाइन
  • अनोखे Pitch-Control Mechanism से 42% अधिक कार्यक्षमता
  • सोलर सिस्टम से जोड़कर 24×7 बिजली उपयोग संभव
  • 12 m/s हवा पर रोज़ 1 यूनिट व महीने में 60 यूनिट तक बिजली उत्पादन क्षमता
  • भारत सरकार से पेटेंट प्राप्त
  • गांव व शहर दोनों क्षेत्रों के लिए उपयुक्त

ऊर्जा बचत और स्थायी ऊर्जा उत्पादन की दिशा में IIT कानपुर ने एक बड़ा कदम उठाया है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने ऐसा कॉम्पैक्ट विंड टरबाइन मॉडल तैयार किया है जिसे घरों, दफ्तरों और ऊंची इमारतों की छतों पर आसानी से लगाया जा सकता है। यह टरबाइन महज़ 3.5 मीटर प्रति सेकंड की धीमी हवा में भी बिजली उत्पन्न कर सकता है, जो इसे शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी बनाता है।

🔬 नई पीढ़ी का VAWT डिज़ाइन

एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के
प्रो. देबोपम दास के नेतृत्व में शिवम शिरभाते और सिद्धार्थ ने यह ऊर्ध्व धुरी वाली विंड टरबाइन (VAWT) विकसित की है।

VAWT का यह आधुनिक डिज़ाइन पारंपरिक विंड टरबाइन की सीमाओं को तोड़ता है और कम हवा वाले क्षेत्रों में भी ऊर्जा उत्पादन संभव बनाता है।

⚙️ अनूठा पिच-कंट्रोल मैकेनिज्म

शोधार्थी शिवम शिरभाते के अनुसार, इस टरबाइन की सबसे बड़ी खासियत इसका Pitch-Control Mechanism है।

ब्लेड हवा की दिशा के अनुसार अपने आप एडजस्ट हो जाते हैं

बेहद धीमी हवा में भी ब्लेड घूमना शुरू कर देते हैं

परंपरागत फिक्स्ड-ब्लेड मॉडल की तुलना में 42% अधिक दक्षता

यह ऑटोमैटिक एडजस्टमेंट हवा की ऊर्जा का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करता है।

🏠 घरों की छत पर लगाने योग्य मॉडल

इसका आकार छोटा और ढांचा हल्का होने के कारण यह मॉडल शहरों और गांवों की किसी भी इमारत की छत पर आसानी से लगाया जा सकता है।

इसे सोलर सिस्टम से जोड़कर दिन और रात दोनों समय बिजली प्राप्त की जा सकती है, जिससे यह हाइब्रिड ऊर्जा समाधान बन जाता है।

🌬️ कितनी बिजली बनेगी?

यदि इसे ऊंची बिल्डिंग या खुले स्थान पर लगाया जाए जहाँ हवा की गति लगभग 12 मीटर प्रति सेकंड हो, तो यह टरबाइन:

  • प्रति दिन 1 यूनिट बिजली, और
  • महीने में लगभग 60 यूनिट बिजली
  • उत्पन्न कर सकता है।
  • 💰 लागत और पेटेंट

इस मॉडल को बनाने में फिलहाल लगभग 60,000 रुपये खर्च आता है। व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू होने पर इसकी लागत और भी कम हो सकती है।

इस अनोखे डिज़ाइन को भारत सरकार की ओर से आधिकारिक पेटेंट भी प्राप्त हो चुका है।

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