दावोस में ट्रंप के खिलाफ महाजुटान: फ्रांस और कनाडा की ‘मिडिल पावर’ देशों से एकजुट होने की अपील, ग्रीनलैंड विवाद पर तनातनी – NewsKranti

दावोस में ट्रंप के खिलाफ महाजुटान: फ्रांस और कनाडा की ‘मिडिल पावर’ देशों से एकजुट होने की अपील, ग्रीनलैंड विवाद पर तनातनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड खरीदने की जिद और कनाडा को लेकर दिए गए बयानों ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। दावोस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कनाडा के नेतृत्व ने मध्यम शक्ति वाले देशों को आगाह किया है कि अगर वे एकजुट नहीं हुए, तो महाशक्तियों का दबाव दुनिया को अस्थिर कर देगा।

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ख़बर एक नज़र में :
  • फ्रांस और कनाडा ने दावोस में मध्यम शक्ति वाले देशों (Middle Powers) को एकजुट होने के लिए प्रेरित किया।
  • डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीदने की जिद को वैश्विक अस्थिरता का कारण बताया गया।
  • अमेरिका ने डेनमार्क और यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी है।
  • ट्रंप द्वारा कनाडा के संप्रभुत्व पर सवाल उठाने से कनाडा सरकार नाराज।
  • इमैनुएल मैक्रों ने बहुपक्षवाद और सहयोग को बचाने पर जोर दिया।

दावोस (स्विट्जरलैंड):

विश्व आर्थिक मंच (Davos 2026) का मंच इस बार आर्थिक चर्चाओं से ज्यादा कूटनीतिक युद्ध का अखाड़ा बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “ग्रीनलैंड खरीदो या हड़पो” नीति और कनाडा के खिलाफ उनके विवादास्पद बयानों ने यूरोपीय और उत्तरी अमेरिकी देशों के बीच गहरी खाई पैदा कर दी है। इसी तनाव के बीच फ्रांस और कनाडा ने दुनिया के ‘मिडिल पावर’ (मध्यम शक्ति वाले) देशों से एक नई वैश्विक एकजुटता का आह्वान किया है।

ट्रंप की टैरिफ और ताकत की धमकी

राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि यदि डेनमार्क ग्रीनलैंड को अमेरिका के हवाले नहीं करता, तो फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों पर 10% से 25% तक का आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जाएगा। ट्रंप ने यहाँ तक संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वे ग्रीनलैंड के लिए “ताकत का इस्तेमाल” भी कर सकते हैं। इसके अलावा, कनाडा को फिर से अमेरिका में मिलाने वाली उनकी टिप्पणियों ने ओटावा (कनाडा) में भारी नाराजगी पैदा की है।

मैक्रों का पलटवार: ‘सहयोग ही एकमात्र विकल्प’

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दावोस में कड़े शब्दों में कहा, “दुनिया में अस्थिरता और असंतुलन का एकमात्र जवाब ज्यादा सहयोग है, न कि महाशक्तियों की दादागिरी।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मध्यम दर्जे की अर्थव्यवस्थाएं और शक्तियां एक स्वर में नहीं बोलीं, तो उन्हें बड़ी शक्तियों के आर्थिक और सामरिक हितों के तले कुचल दिया जाएगा।

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वैश्विक व्यवस्था पर संकट

कनाडा और फ्रांस के इस रुख का समर्थन कई अन्य देशों ने भी किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की वापसी के बाद जिस तरह से ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति विस्तारवादी मोड़ ले रही है, उससे नाटो (NATO) और जी-7 (G7) जैसे समूहों के भीतर दरारें और गहरी होंगी। दावोस में उठी यह ‘मिडिल पावर’ की आवाज आने वाले समय में एक नया वैश्विक गुट बनाने की दिशा में पहला कदम हो सकती है।

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