ट्रंप का बड़ा दांव: 8 युद्ध रोकने वाले राष्ट्रपति ने अब पाक-अफगान जंग में

ट्रंप का यू-टर्न! 8 युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले ‘शांतिदूत’ ने पाक-अफगान जंग से बनाई दूरी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो खुद को शांति का मसीहा बताते हैं, उन्होंने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी 'खुले युद्ध' में दखल देने से फिलहाल हाथ खींच लिए हैं।

admin
By
admin
3 Min Read
ख़बर एक नज़र में :
  • युद्ध का दावा: ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि उनके कार्यकाल में दुनिया ने शांति देखी और उन्होंने कई युद्धों को होने से रोका।
  • तालिबान का रुख: अफगान तालिबान ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी संप्रभुता के साथ समझौता नहीं करेंगे।
  • पाकिस्तान की दुविधा: पाकिस्तान एक तरफ आतंकवाद से जूझ रहा है और दूसरी तरफ तालिबान के साथ उसके संबंध अब तक के सबसे खराब दौर में हैं।
  • अमेरिकी विदेश विभाग: जहाँ ट्रंप शांत हैं, वहीं अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान के 'आत्मरक्षा के अधिकार' का समर्थन कर संतुलन बनाने की कोशिश की है।

दुनिया भर में जारी संघर्षों को “एक फोन कॉल” पर रोकने का दावा करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताजा बयान ने दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। जहाँ एक तरफ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर ‘खूनी संघर्ष’ छिड़ा हुआ है, वहीं ट्रंप ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।

यह खबर इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि महज कुछ समय पहले तक ट्रंप यह दावा कर रहे थे कि वे दुनिया के किसी भी युद्ध को चुटकियों में सुलझा सकते हैं।

क्या है पूरा मामला?

हाल के दिनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान (तालिबान शासन) के बीच डूरंड रेखा पर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तानी विमानों द्वारा अफगान सीमा के अंदर बमबारी और तालिबान की ओर से जवाबी कार्रवाई ने इसे एक ‘अघोषित युद्ध’ का रूप दे दिया है। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि उसके “पुराने दोस्त” डोनाल्ड ट्रंप बीच में आकर तालिबान को सख्त संदेश देंगे, लेकिन ट्रंप के रुख ने इस्लामाबाद की चिंता बढ़ा दी है।

- Advertisement -

“मैं युद्ध रुकवाने में माहिर हूँ, लेकिन…”

एक प्रेस वार्ता के दौरान जब ट्रंप से पाक-अफगान विवाद पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने अपने पुराने दावों को तो दोहराया कि उन्होंने 8 युद्ध खत्म करवाए हैं, लेकिन इस विशेष मामले में उन्होंने कूटनीतिक दूरी बना ली। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने संकेत दिया कि यह क्षेत्र का आंतरिक मामला है और दोनों देशों को अपने स्तर पर इसे सुलझाना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अब ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत बिना किसी ठोस फायदे के दूसरे देशों के झगड़ों में सीधे नहीं पड़ना चाहते।

पाकिस्तान की ‘गिड़गिड़ाहट’ और भारत का जिक्र

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ट्रंप की तारीफों के पुल बांधे हैं। पाकिस्तान ने यहाँ तक दावा किया था कि ट्रंप “दक्षिण एशिया के रक्षक” हैं। लेकिन अब जब डूरंड लाइन पर आग लगी है, तो ट्रंप का यह ‘मौन’ पाकिस्तान के लिए किसी झटके से कम नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने इस विवाद में भारत की ‘प्रॉक्सी वॉर’ का भी डर दिखाया था, जिसे ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल गंभीरता से नहीं लिया है।

Share This Article