गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की स्थानीय अदालत ने रिश्तों को तार-तार करने वाले एक बेहद सनसनीखेज हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अपने ही सगे मासूम भांजे की बेरहमी से हत्या करने के आरोपी मामा को दोषी करार देते हुए फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है। इस खौफनाक वारदात ने न केवल पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था, बल्कि समाज में खून के रिश्तों पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया था। अदालत ने मामले की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) मामला माना है।
जमीनी विवाद और आपसी रंजिश बनी हत्या की वजह
पुलिस जांच और अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार, इस पूरे जघन्य हत्याकांड के पीछे की मुख्य वजह पारिवारिक जमीनी विवाद और आपसी रंजिश थी। आरोपी मामा का अपने ही सगे बहन और जीजा के परिवार के साथ काफी समय से विवाद चल रहा था। इसी रंजिश का बदला लेने के लिए आरोपी ने एक बेहद खौफनाक और सोची-समझी साजिश रची। उसने अपने परिवार के इस विवाद में एक मासूम और बेकसूर बच्चे को निशाना बनाने का फैसला किया, जिसका इस पूरे विवाद से कोई लेना-देना नहीं था।
बहला-फुसलाकर किया था मासूम का अपहरण
वारदात वाले दिन आरोपी मामा ने बड़ी ही चालाकी से अपने मासूम भांजे को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। बच्चे को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस मामा की उंगली पकड़कर वह जा रहा है, वही उसकी जान का दुश्मन बनने वाला है। जब काफी देर तक बच्चा घर नहीं लौटा, तो परिजनों को चिंता हुई और उन्होंने उसकी तलाश शुरू की। आरोपी मामा भी इस दौरान इस तरह नाटक करता रहा जैसे उसे कुछ पता ही न हो, ताकि किसी को उस पर शक न हो।
बेरहमी से घोंटा गला, झाड़ियों में फेंका शव
जब आरोपी मासूम को सुनसान इलाके में ले गया, तो उसने अपनी रंजिश पूरी करने के लिए बच्चे की बेरहमी से गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या करने के बाद उसने शव को छिपाने के उद्देश्य से दूर झाड़ियों में या खेत में फेंक दिया। पुलिस ने जब परिजनों की तहरीर पर गुमशुदगी और अपहरण का मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की, तो कड़ाई से पूछताछ में मामा का झूठ टिक नहीं सका। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने मासूम के शव को क्षत-विक्षत हालत में बरामद किया था, जिसे देखकर हर किसी की रूह कांप गई थी।
पुलिस की मजबूत पैरवी और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने दिलाई सजा
घटना के बाद गाजीपुर पुलिस ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। तत्कालीन जांच अधिकारी ने इस केस में त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी वैज्ञानिक साक्ष्य, फॉरेंसिक सबूत और गवाहों के बयान समय पर अदालत में दाखिल किए। अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) ने अदालत के सामने दलील दी कि जिस मामा पर भांजे की रक्षा करने की जिम्मेदारी थी, उसी ने इतनी बेरहमी से उसकी जान ले ली। इस तरह के अपराधी समाज के लिए नासूर हैं और इनके प्रति कोई भी नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।
‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ मामला मानकर कोर्ट ने सुनाया मृत्युदंड
गाजीपुर के माननीय न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, गवाहों के बयानों का अवलोकन करने और पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी मामा को भारतीय न्याय संहिता (या तत्कालीन आईपीसी) की सुसंगत धाराओं के तहत हत्या और अपहरण का दोषी पाया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह अपराध अत्यंत क्रूर और अमानवीय है, जो समाज की अंतरात्मा को झकझोरता है। अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाने के साथ-साथ उस पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट के इस सख्त फैसले का उपस्थित लोगों और पीड़ित परिवार ने स्वागत किया है।
