वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सीजफायर (युद्धविराम) की बातचीत को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। वैश्विक व्यापार के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधा और भीषण सैन्य टकराव शुरू हो गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि उसके युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों ने खाड़ी क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग को खतरा पैदा कर रहे ईरान के चार ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ (आत्मघाती ड्रोनों) को मार गिराया है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह पूरी कार्रवाई विशुद्ध रूप से रक्षात्मक और अमेरिकी सैन्य संपत्तियों की सुरक्षा के लिए की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन को मार गिराने के तुरंत बाद अमेरिकी सेना ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए ईरान के रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास (Bandar Abbas) में एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर सटीक मिसाइल हमला किया। अमेरिकी खुफिया एजेंसी का दावा है कि यह कंट्रोल सेंटर ठीक उसी समय पांचवें ड्रोन को लॉन्च करने की अंतिम तैयारी कर रहा था, जिसे समय रहते नष्ट कर दिया गया।
“ईरान अंतिम सांसों पर बातचीत कर रहा है” — राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
इस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद व्हाइट हाउस में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी सरकारी मीडिया के उन दावों को पूरी तरह से “मनगढ़ंत और कोरी कल्पना” करार दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सामान्य करने के लिए एक अनौपचारिक समझौता मसौदा तैयार हो गया है।
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: “ईरान इस समय पूरी तरह से टूट चुका है और वह अंतिम सांसों पर (Negotiating on fumes) बातचीत की मेज पर बैठा है। हम किसी भी जल्दबाजी में नहीं हैं और नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) हमें किसी खराब समझौते को स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह सीमित नहीं करता और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र पर जबरन कब्जा बंद नहीं करता, तब तक कोई स्थायी राहत नहीं दी जाएगी।”
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का पलटवार और कुवैत में हड़कंप
दूसरी तरफ, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने बंदर अब्बास के पास अमेरिकी हवाई हमलों की बात स्वीकार की है। हालांकि, ईरान का दावा है कि इस हमले में उनका कोई बड़ा नुकसान या जानमाल की क्षति नहीं हुई है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने अपनी ‘आक्रामक नीतियां’ बंद नहीं कीं, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके साथ ही ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि उनकी नौसेना ने होर्मुज पार करने की कोशिश कर रहे एक अमेरिकी तेल टैंकर पर चेतावनी भरे शॉट दागे, जिससे उसे वापस मुड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
इस सैन्य टकराव की लहरें अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में महसूस की जा रही हैं। कुवैत की सेना ने आपातकालीन बयान जारी कर बताया कि देश के उत्तरी और तटीय इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं, जो उनके एयर डिफेंस सिस्टम (वायु रक्षा प्रणाली) द्वारा अज्ञात मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही मार गिराने के कारण हुईं। हालांकि, कुवैत ने यह साफ नहीं किया कि ये मिसाइलें किस देश की सीमा से दागी गई थीं।
आर्थिक मोर्चे पर घेराबंदी: ईरान की ‘स्ट्रेट अथॉरिटी’ पर प्रतिबंध
सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक शिकंजा भी कस दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को ईरान की ‘परेशियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। यह ईरान की वह नई एजेंसी है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों से जबरन ‘ट्रांजिट फीस’ (टैक्स) वसूल कर रही थी।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया का कोई भी देश या कंपनी यदि ईरान की इस अथॉरिटी को भुगतान करेगी, तो उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि यह पैसा सीधे तौर पर आतंकी गतिविधियों और हथियार निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस नए विवाद के बाद कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में एक बार फिर भारी उछाल देखने को मिल सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
