Karnataka CM Siddaramaiah Resigns: सिद्धारमैया ने सीएम पद से दिया

कर्नाटक में सियासी भूचाल: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दिया इस्तीफा, बोले- ‘हाईकमान ने जो कहा, मैंने वो किया’

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद राज्यपाल के सचिव को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के आदेश पर उन्होंने यह कदम उठाया है, जबकि कांग्रेस के पास राज्य में पूर्ण बहुमत है।

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ख़बर एक नज़र में :
  • कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दोपहर 3:00 बजे अपने पद से इस्तीफा दिया।
  • राज्यपाल थावरचंद गहलोत के शहर में न होने के कारण इस्तीफा उनके सचिव को सौंपा गया।
  • सिद्धारमैया ने कहा- "हाईकमान ने कल रात इस्तीफा देने को कहा था, मैंने आज आदेश का पालन किया।"
  • सिद्धारमैया ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार पूरी तरह सुरक्षित है और हमारे पास 135+ विधायकों का पूर्ण बहुमत है।
  • डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जिसके बाद नए सीएम के नाम को लेकर सस्पेंस गहराया।

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। गुरुवार दोपहर ठीक 3 बजे सिद्धारमैया ने राजभवन (लोकभवन) जाकर अपना इस्तीफा सौंपा। चूंकि राज्यपाल थावरचंद गहलोत इस समय बेंगलुरु से बाहर हैं, इसलिए मुख्यमंत्री ने तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपना इस्तीफा राज्यपाल के सचिव को हैंडओवर कर दिया।

इस्तीफा देने के तुरंत बाद सिद्धारमैया ने एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने बेहद शांत लेकिन गंभीर लहजे में कहा, “मैं पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुका हूँ कि जब भी पार्टी का हाईकमान मुझसे पद छोड़ने के लिए कहेगा, मैं एक अनुशासित सिपाही की तरह उसका पालन करूँगा। कल रात ही मुझे हाईकमान की तरफ से निर्देश मिले थे, और आज मैंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है।”

पार्टी हाईकमान का दबाव या कोई अंदरूनी समझौता?

राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। चर्चा है कि कांग्रेस आलाकमान ने कर्नाटक में सरकार गठन के समय ही ‘पावर-शेयरिंग’ (ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला) फॉर्मूले पर सहमति बनाई थी। हालांकि, सिद्धारमैया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसी भी अंदरूनी कलह या नाराजगी से साफ इनकार किया।

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सिद्धारमैया ने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा, “कर्नाटक में हमारी सरकार को कोई खतरा नहीं है। हमारे पास 135 निर्वाचित विधायक हैं और दो अन्य निर्दलीय विधायकों का भी हमें पूरा समर्थन हासिल है। कांग्रेस पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है और हमारे सभी विधायक चट्टान की तरह एकजुट हैं। मुझे कर्नाटक की 7 करोड़ जनता की सेवा करने का दो बार मौका मिला, जिसके लिए मैं राज्य के लोगों और अपनी पार्टी का आभारी हूँ।”

डीके शिवकुमार ने छुए पैर, भावुक हुए नेता

इस्तीफे के घटनाक्रम के बीच बेंगलुरु के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद भावुक और रणनीतिक तस्वीर भी सामने आई। इस्तीफे के ऐलान से ठीक पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) ने सिद्धारमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद सिद्धारमैया ने शिवकुमार को गले लगा लिया।

इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। कयास लगाए जा रहे हैं कि डीके शिवकुमार ही कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं, जिन्होंने इस पद को पाने के लिए दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा था।

क्या बदलेगा कर्नाटक में कांग्रेस का गेमप्लान?

सिद्धारमैया का मुख्यमंत्री पद से हटना कर्नाटक कांग्रेस के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है। सिद्धारमैया राज्य के सबसे कद्दावर अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) नेता माने जाते हैं। ऐसे में उनके इस्तीफे के बाद आगामी चुनावों और राज्य की कानून व्यवस्था व योजनाओं पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। राज्यपाल के बेंगलुरु लौटते ही उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया जाएगा और इसके तुरंत बाद कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी।

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