मेरठ। अपराध की राह पर पैर रखने के बाद जब इंसान का सामना कड़वी हकीकत से होता है, तो सबसे पहले मन में पश्चाताप का भाव जागता है। ऐसा ही कुछ मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार की बैरक नंबर 12ए में देखने को मिल रहा है। यहाँ अपनों के ही खून से अपने हाथ रंगने वाली और खुद का सुहाग उजाड़ने वाली पांच महिलाएं आज एक ही बैरक में बंद हैं। बंद चहारदीवारी के भीतर अब इन महिलाओं के दिलों में अपने किए का भारी पछतावा है, जिसे दूर करने के लिए उन्होंने अध्यात्म और कर्म का सहारा लिया है।
भजन-कीर्तन से होती है सुबह की शुरुआत
इस बैरक का माहौल जेल की बाकी बैरकों से बिल्कुल अलग है। यहाँ भोर होते ही सुंदरकांड के पाठ की गूंज सुनाई देने लगती है। इसके बाद सभी महिलाएं मिलकर भजन-कीर्तन करती हैं। जेल प्रशासन के अनुसार, सुबह की इस आध्यात्मिक शुरुआत के जरिए ये महिलाएं अपने भीतर छाए अपराधबोध और मानसिक तनाव से जूझने का प्रयास कर रही हैं।
सिलाई-कढ़ाई में खुद को व्यस्त रख रहीं महिलाएं
अध्यात्म के साथ-साथ इन महिलाओं ने खुद को पूरी तरह कर्म से जोड़ लिया है। बैरक में बंद अंजलि, र्विता और कोमल जैसी महिलाएं दिनभर सिलाई-कढ़ाई के काम में खुद को व्यस्त रखती हैं। वहीं, अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति सौरभ की हत्या करने वाली मुस्कान, जेल के नियमों के तहत अपनी नन्ही बेटी के साथ समय बिताती है।
जेल प्रशासन की अनूठी पहल : एक साथ रखने की वजह
वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि इन महिलाओं को एक ही बैरक में रखने का उद्देश्य बेहद मानवीय है। जेल प्रशासन चाहता है कि ये महिलाएं मुश्किल समय में एक-दूसरे का मानसिक और भावनात्मक सहारा बन सकें। वर्तमान में इनमें से कई महिलाएं गहरे पछतावे में हैं और अपनों से मिलने पर उनका भावनात्मक संतुलन डगमगा जाता है। ऐसे में एक-दूसरे का साथ इन्हें संबल दे रहा है।अपराध के काले पन्नों को पीछे छोड़, मेरठ जेल की ये बंदी महिलाएं अब सुधार और आत्म-मंथन की एक नई इबारत लिख रही हैं।
