कानपुर, जून 2026। उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों में से एक, कानपुर के गोविंद नगर क्षेत्र में राज्य कर विभाग, एसजीएसटी (SGST) सेक्टर-3 के तत्वावधान में एक ऐतिहासिक और अत्यंत प्रभावी “व्यापारी संवाद कार्यक्रम” का सफल आयोजन किया गया। इस वृहद संवाद सत्र का मूल उद्देश्य कर प्रशासन और व्यापारिक समुदाय के बीच की प्रशासनिक दूरियों को समाप्त करना, पारदर्शी कर प्रणाली को बढ़ावा देना और जीएसटी अनुपालन से जुड़ी व्यावहारिक जटिलताओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान प्रस्तुत करना था। इस बैठक में गोविंद नगर और उसके आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के सैकड़ों प्रतिष्ठित लघु व मध्यम उद्यमियों (MSMEs), थोक व्यापारियों तथा कर विशेषज्ञों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
व्यापार सुगमता और पारदर्शी कर अनुपालन पर अधिकारियों का विशेष जोर
संवाद कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राज्य कर विभाग के उपायुक्त (खंड-3) श्री कौशलेश ने व्यापारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि विभाग की प्राथमिक भूमिका केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि एक उत्प्रेरक के रूप में व्यापारिक वातावरण को अधिक सुगम और सुदृढ़ बनाना भी है। उन्होंने बताया कि सरकार की नीति पूर्णतः व्यापार-हितैषी है और तकनीकी खामियों या अनजाने में हुई लिपिकीय त्रुटियों के लिए किसी भी ईमानदार व्यापारी को प्रताड़ित नहीं किया जाएगा। उपायुक्त ने नवीन जीएसटी पंजीकरण (New GST Registration) की सरलीकृत ऑनलाइन प्रक्रियाओं और विभाग द्वारा दी जा रही डिजिटल सुविधाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।
इसी क्रम में, सहायक आयुक्त श्री महेंद्र कुमार ने व्यापारियों को समय पर जीएसटीआर-1 (GSTR-1) और जीएसटीआर-3बी (GSTR-3B) रिटर्न दाखिल करने के रणनीतिक लाभ समझाए। उन्होंने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के सही मिलान (Reconciliation) पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यदि व्यापारी अपने वेंडर्स के साथ नियमित समन्वय रखेंगे, तो मिसमैच की समस्या से पूरी तरह बचा जा सकता है। वाणिज्य कर अधिकारी श्री अफजल हुसैन ने भी कर अनुपालन से जुड़ी विधिक प्रणालियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने व्यापारियों को अपने बही-खातों और इनवॉइसिंग को पारदर्शी रखने के व्यावहारिक गुर सिखाए, ताकि भविष्य में स्क्रूटनी या ऑडिट के समय किसी भी प्रकार की वैधानिक कठिनाई उत्पन्न न हो।
कर अधिवक्ता देवेंद्र डांग का विधिक मार्गदर्शन और व्यापारियों की मुखर आवाज
इस महत्वपूर्ण बैठक का कुशल संयोजन एवं संचालन क्षेत्र के सुप्रसिद्ध विधिक विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र डांग द्वारा किया गया। अधिवक्ता डांग ने कर प्रशासन के समक्ष व्यापारियों का पक्ष मजबूती से रखते हुए कहा कि अक्सर जटिल नियमावलियों के कारण छोटे व्यापारियों में एक अनजाना भय रहता है। ऐसे सीधे संवाद कार्यक्रम उस भय को दूर करने और कर अनुपालन की दर को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होते हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से स्थानीय स्तर पर एक त्वरित समाधान डेस्क स्थापित करने का भी आग्रह किया।
सत्र के दौरान उपस्थित व्यापारियों ने भी खुलकर अपनी बात रखी। उद्यमियों ने नए नियमों, ई-वे बिल (E-Way Bill) की व्यावहारिक समस्याओं और इनपुट क्रेडिट ब्लॉक होने जैसे विषयों पर अधिकारियों से सीधे तीखे और तार्किक प्रश्न पूछे, जिनका अधिकारियों द्वारा अत्यंत संतोषजनक और विधिक समाधान प्रस्तुत किया गया।
कानपुर के औद्योगिक विकास में समन्वय की नई मिसाल
इस वृहद बैठक में प्रमुख रूप से क्षेत्र के दिग्गज उद्यमी और गणमान्य व्यापारी उपस्थित रहे, जिनमें श्री रितेश पटेल, श्री अमित छाबड़ा, श्री प्रवेश कुमार, श्री अरुण जैन, श्री हितेश लाखमानी, श्री रमेश कालरा, श्री अंकित रामचंदानी, श्री गुरप्रीत सिंह, श्री जितेंद्र चुघ, श्री सक्षम मल्होत्रा, श्री राजीव वर्मा, तथा श्री राजेश अरोड़ा शामिल थे।
सभी प्रतिभागियों ने एक सुर में स्वीकार किया कि कर विभाग का यह सहयोगात्मक और सकारात्मक दृष्टिकोण कानपुर के व्यापार जगत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उपस्थित व्यापारियों ने इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि अब अधिकारी स्वयं चलकर उनके बीच आ रहे हैं और समस्याओं को सुन रहे हैं, जो कि उत्तम कर-प्रशासन का एक जीवंत उदाहरण है।
