कानपुर (4 जून 2026): विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के मौके पर औद्योगिक शहर कानपुर से एक बेहद सुकून देने वाली और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। प्रदूषण और ट्रैफिक जाम से जूझते शहरों के लिए कानपुर मेट्रो (Kanpur Metro) अब सिर्फ एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की एक जीती-जागती मिसाल बन चुकी है। ‘जीरो कार्बन एमिशन’ के लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने कानपुर के कॉरिडोर-1 (कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता) के तहत बन रहे नए स्टेशनों को पूरी तरह से ‘इको-फ्रेंडली’ तकनीक से लैस कर दिया है।
प्राकृतिक रोशनी से जगमगाएंगे प्लेटफॉर्म, घटेगा बिजली का बिल
बारादेवी से नौबस्ता के बीच तैयार हो रहे 5 नए एलिवेटेड स्टेशनों का डिजाइन कुछ इस तरह तैयार किया गया है कि दिन के समय यहाँ कृत्रिम लाइटों (बल्ब या ट्यूबलाइट) की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। मेट्रो प्रशासन ने इन स्टेशनों की छतों के निर्माण में प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग (PEB) स्ट्रक्चर का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। इस अत्याधुनिक तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ट्रांसलूसेंट (पारदर्शी) शीट लगाई गई हैं, जिससे सूर्य की प्राकृतिक रोशनी सीधे प्लेटफॉर्म तक पहुँचती है।
इसके अलावा, बिना किसी बीच के पिलर के यह स्ट्रक्चर एक बड़े इलाके को कवर करता है, जो दिखने में बेहद खूबसूरत और आधुनिक लगता है। स्टेशनों के कॉनकोर्स (प्रथम तल) को भी पूरी तरह से हवादार बनाया गया है। चौड़ी खिड़कियां और जालियां प्राकृतिक वेंटिलेशन का काम करेंगी, जिससे बड़े-बड़े एसी और पंखों पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भारी गिरावट आएगी।
सड़क के बीच 1200 वर्ग मीटर में हरियाली और वाटर हार्वेस्टिंग
कानपुर मेट्रो का प्रयास सिर्फ स्टेशनों की छतों तक सीमित नहीं है। आईआईटी से कानपुर सेंट्रल तक की सफलता के बाद, अब बारादेवी-नौबस्ता एलिवेटेड सेक्शन के नीचे (मीडियन पर) लगभग 1200 वर्ग मीटर क्षेत्र में एक विशाल ‘ग्रीन बेल्ट’ विकसित की गई है। शहर की धूल और धुएं (वायु प्रदूषण) को सोखने में यह हरियाली एक प्राकृतिक फिल्टर का काम करेगी।
बारिश के पानी की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए मेट्रो ने वायाडक्ट (पुल) के ड्रेनेज सिस्टम को सीधे नीचे बने ग्रीन बेल्ट से जोड़ दिया है। यानी, बारिश का पानी नालियों में बहने के बजाय सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचेगा। आपको बता दें कि कानपुर मेट्रो ने अब तक शहर में कुल 35,000 वर्ग मीटर का विशाल हरित क्षेत्र (Green Cover) विकसित कर लिया है।
हाई-टेक तकनीक: रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और स्मार्ट सेंसर्स
तकनीकी मोर्चे पर यूपीएमआरसी का काम चौंकाने वाला है। मेट्रो ट्रेनों और लिफ्टों में ‘रीजेनरेटिव ब्रेकिंग’ तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है—यानी जब ट्रेन में ब्रेक लगता है, तो उससे पैदा होने वाली ऊर्जा वापस पावर ग्रिड में चली जाती है और दोबारा इस्तेमाल होती है।
ट्रेनों के अंदर कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) सेंसर आधारित HVAC (एसी) सिस्टम लगा है, जो भीड़ के हिसाब से कूलिंग को एडजस्ट करता है, जिससे 12 से 16 प्रतिशत बिजली बचती है। इसके अलावा, मेट्रो डिपो में लगा 1 मेगावाट का सोलर प्लांट और ‘जीरो डिस्चार्ज सिस्टम’ (पानी का 100% रिसाइकल) कानपुर मेट्रो को देश की सबसे एडवांस मेट्रो प्रणालियों में से एक बनाता है।
प्लेटिनम रेटिंग और राष्ट्रपति का सम्मान
कानपुर मेट्रो की इन पर्यावरण-अनुकूल नीतियों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) ने मेट्रो के सभी संचालित स्टेशनों को प्रतिष्ठित ‘प्लेटिनम रेटिंग’ दी है। यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने इस सफलता पर गर्व जताते हुए कहा, “मेट्रो अन्य परिवहन साधनों की तुलना में पर्यावरण की सबसे अच्छी मित्र है। बारादेवी से नौबस्ता तक के नए स्टेशन डिजाइन और पर्यावरण के लिहाज से पूरी तरह अनुकूल हैं।”
उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2025 में आईआईटी कानपुर मेट्रो स्टेशन को ऊर्जा संरक्षण में बेमिसाल प्रदर्शन के लिए देश की राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी के हाथों ‘सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट’ मिल चुका है। यह सम्मान इस बात का सबूत है कि कानपुर मेट्रो सिर्फ शहर की रफ्तार नहीं बढ़ा रही, बल्कि शहर को सांस लेने के लिए एक साफ हवा वाला माहौल भी दे रही है।
