नई दिल्ली: देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीद सैनिकों के परिवारों के कल्याण के लिए भारतीय सेना ने एक सराहनीय और ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश के सात प्रमुख हवाई अड्डों पर अब शहीद सैनिकों के परिवारजनों (वीर नारियों और उनके बच्चों) को सम्मानजनक रोजगार प्रदान किया जाएगा। इस बड़े कल्याणकारी उद्देश्य को पूरा करने के लिए भारतीय सेना और विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एयर इंडिया लिमिटेड (Air India Limited) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoC) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह समझौता भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी (General Upendra Dwivedi) की विशेष उपस्थिति में संपन्न हुआ। सेना मुख्यालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस दूरदर्शी साझेदारी का मूल उद्देश्य वीर नारियों और उनके आश्रित परिवारों को दीर्घकालिक व स्थायी सहायता प्रदान करना है, ताकि सैन्य समुदाय का सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण सुनिश्चित किया जा सके और शहीदों के परिवारों को एक आत्मनिर्भर व गरिमापूर्ण जीवन मिल सके।
रोजगार, सशक्तिकरण और पर्यावरण के तीन मजबूत स्तंभ
भारतीय सेना ने इस ऐतिहासिक साझेदारी की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि एयर इंडिया के साथ किया गया यह समझौता मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण स्तंभों पर आधारित है— पहला ‘रोजगार’ (Employment), दूसरा ‘सशक्तिकरण’ (Empowerment), और तीसरा ‘पर्यावरण’ (Environment)। इन तीनों ही क्षेत्रों में यह साझेदारी सैन्य परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में मील का पत्थर साबित होगी।
इस समझौते के विशिष्ट विवरणों के अनुसार, एयर इंडिया लिमिटेड द्वारा देश के सात चिन्हित प्रमुख हवाई अड्डों पर वीर नारियों के लिए 20 सीधे रोजगार के अवसर और शहीदों के बच्चों के लिए 40 रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इस प्रकार कुल 60 परिवारों को सीधे तौर पर विमानन क्षेत्र जैसी प्रतिष्ठित इंडस्ट्री में मुख्यधारा से जुड़ने और सम्मानजनक आजीविका कमाने का अवसर प्राप्त होगा। यह नियुक्तियां हवाई अड्डों पर विभिन्न परिचालन, ग्राउंड हैंडलिंग या प्रशासनिक भूमिकाओं में की जा सकती हैं, जिससे इन परिवारों को एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण कार्य वातावरण मिल सके।
25 आशा स्कूलों में व्यावसायिक प्रशिक्षण का खुलेगा रास्ता
इस साझेदारी का लाभ केवल सीधे रोजगार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को तैयार करने के लिए भी इसमें विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत भारतीय सेना द्वारा विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों और सैन्य परिवारों के आश्रितों के लिए संचालित किए जाने वाले 25 ‘आशा स्कूलों’ (Asha Schools) का आधुनिक कायाकल्प किया जाएगा।
इन सभी 25 स्कूलों में आधुनिक और उन्नत व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं (Professional & Vocational Training Laboratories) स्थापित की जाएंगी। इन विशेष प्रयोगशालाओं के माध्यम से छात्रों को विभिन्न उद्योगों और आधुनिक रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि ये बच्चे भविष्य में तकनीकी रूप से कुशल होकर अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे और सम्मान के साथ आजीविका कमा सकेंगे।
सैन्य अस्पतालों को मिलेंगे बैटरी चालित ई-कार्ट
समझौते के तीसरे स्तंभ ‘पर्यावरण और स्वास्थ्य’ को ध्यान में रखते हुए एक और बेहतरीन पहल की गई है। भारतीय सेना के विभिन्न अस्पतालों में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक मरीज-अनुकूल बनाने के लिए बैटरी से चलने वाली आधुनिक ‘ई-कार्ट’ (E-Carts) गाड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
इन प्रदूषण-मुक्त ई-कार्ट्स का प्राथमिक उपयोग विशेष रूप से अस्पताल परिसरों में आने वाले बुजुर्गों, युद्ध के दौरान घायल हुए वीर जवानों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों की आंतरिक आवाजाही को सुगम और आसान बनाने के लिए किया जाएगा। इससे विशाल मिलिट्री अस्पताल परिसरों में मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड या ओपीडी तक जाने में होने वाली शारीरिक असुविधा से पूरी तरह से मुक्ति मिल जाएगी। देश के रक्षा विशेषज्ञों और नागरिक समाज ने भारतीय सेना और एयर इंडिया के इस बहुआयामी समझौते की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
